कायमगंज में बड़ा हादसा टला: जर्जर भवन का छज्जा गिरा, 65 बच्चों की जान पर मंडरा रहा था खतरा

कायमगंज में बड़ा हादसा टला: जर्जर भवन का छज्जा भरभराकर गिरा, 65 बच्चों की जान पर मंडरा रहा था खतरा

कन्या विद्यापीठ इंटर कॉलेज के पास गिरा वर्षों पुराना छज्जा, प्रशासनिक लापरवाही पर उठे सवाल

कायमगंज/फर्रुखाबाद: शहर में जर्जर भवनों को लेकर प्रशासनिक दावों की पोल उस समय खुल गई जब कन्या विद्यापीठ इंटर कॉलेज की गली में स्थित वर्षों पुराने सियाराम पार वाले भवन का जर्जर छज्जा अचानक भरभराकर गिर पड़ा। गनीमत रही कि घटना के समय कोई व्यक्ति उसकी चपेट में नहीं आया, अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था। छज्जा गिरते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई और आसपास मौजूद लोगों में दहशत फैल गई।

शिविर शुरू होने से पहले हुआ हादसा, टला बड़ा खतरा

घटना को और गंभीर बनाने वाली बात यह है कि जिस स्थान पर यह जर्जर भवन स्थित है, उसके ठीक पास कन्या विद्यापीठ इंटर कॉलेज परिसर में शिव शक्ति अखाड़ा द्वारा ग्रीष्मकालीन प्रशिक्षण शिविर संचालित किया जा रहा है। 20 मई से 20 जून तक चल रहे इस शिविर में प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक करीब 65 छात्र-छात्राएं प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार छज्जा प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू होने से लगभग आधा घंटा पहले गिरा। यदि यह घटना प्रशिक्षण के दौरान होती तो दर्जनों बच्चों की जान जोखिम में पड़ सकती थी और एक बड़ा हादसा हो सकता था।

स्थानीय लोगों ने पहले भी की थीं शिकायतें

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह भवन लंबे समय से जर्जर हालत में खड़ा था और इसके संबंध में कई बार प्रशासन को शिकायतें भी की गई थीं। बावजूद इसके भवन को सुरक्षित कराने या उसे हटाने के लिए कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।

क्षेत्रवासियों का आरोप है कि प्रशासन की अनदेखी के कारण ही यह स्थिति उत्पन्न हुई है। समय रहते उचित कदम उठाए जाते तो इस तरह का खतरा पैदा नहीं होता।

जांच के आदेश के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई

स्थानीय नागरिकों ने बताया कि पूर्व जिलाधिकारी द्वारा शहर के जर्जर भवनों की पहचान और जांच के लिए टीम गठित की गई थी। इसके बावजूद खतरनाक स्थिति में खड़े इस भवन को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

अब छज्जा गिरने की घटना के बाद प्रशासनिक कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगों का कहना है कि शहर में अभी भी कई ऐसे जर्जर भवन मौजूद हैं जो किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं।

स्थानीय लोगों ने की तत्काल कार्रवाई की मांग

घटना के बाद स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि जर्जर भवन को तत्काल सुरक्षित कराया जाए तथा शहर और कस्बों में खतरनाक स्थिति में खड़े अन्य भवनों का भी सर्वे कराया जाए।

लोगों का कहना है कि किसी बड़े हादसे का इंतजार करने के बजाय प्रशासन को पहले से सतर्कता बरतनी चाहिए और जन सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए।

प्रशासनिक निगरानी पर उठे गंभीर सवाल

फिलहाल इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई है, लेकिन जिस प्रकार 65 बच्चों की मौजूदगी वाले प्रशिक्षण शिविर के निकट यह हादसा हुआ, उसने प्रशासनिक निगरानी और सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जर्जर भवनों की शिकायतें पहले से थीं और जांच के आदेश भी दिए गए थे, तो आखिर इस भवन को सुरक्षित कराने की कार्रवाई क्यों नहीं की गई?

 

 

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