अमेठी : फसलों को जंगली जानवरों से बचाने के लिए खेतों के चारों ओर करंट वाली बाड़ लगाने का चलन बढ़ रहा है, लेकिन यह किसानों के लिए गंभीर कानूनी परेशानी का कारण बन सकता है. अधीक्षण अभियंता विद्युत वितरण मंडल गौरीगंज, जनपद अमेठी अरुण कुमार सिंह ने बताया कि घरेलू या कृषि विद्युत लाइन से सीधे जोड़कर खेतों में करंट प्रवाहित करना पूरी तरह अवैध है और इससे किसी भी प्रकार की जनहानि होने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.
उन्होंने बताया कि केवल निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप कम वोल्टेज वाली सौर ऊर्जा संचालित फेंसिंग का उपयोग किया जा सकता है, जो गैर – घातक झटका देती है. इसके लिए भी सभी तकनीकी मानकों और आवश्यक अनुमतियों का पालन करना जरूरी है.
अरुण कुमार सिंह ने कहा कि यदि अवैध रूप से लगाए गए करंटयुक्त तार या बाड़ के संपर्क में आने से किसी व्यक्ति या पशु की मृत्यु होती है, तो भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत गैर इरादतन हत्या अथवा लापरवाही से मृत्यु कारित करने जैसे गंभीर मामलों में मुकदमा दर्ज किया जा सकता है.
उन्होंने बताया कि विद्युत अधिनियम, 2003 के तहत घरेलू या कृषि कनेक्शन का उपयोग कर बाड़ में करंट प्रवाहित करना बिजली के अनधिकृत उपयोग की श्रेणी में आता है. ऐसे मामलों में बिजली विभाग कनेक्शन विच्छेदित करने, आर्थिक दंड लगाने और अन्य वैधानिक कार्रवाई करने का अधिकार रखता है. अधीक्षण अभियंता ने यह भी बताया कि यदि करंटयुक्त बाड़ की वजह से किसी संरक्षित वन्यजीव की मृत्यु होती है तो वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत भी कठोर कार्रवाई की जा सकती है.
उन्होंने किसानों से अपील की कि फसलों की सुरक्षा के लिए अवैध रूप से करंट प्रवाहित बाड़ का प्रयोग न करें तथा स्वीकृत एवं सुरक्षित तकनीकों का उपयोग करें, जिससे मानव जीवन, पालतू पशुओं और वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.














































