फर्रुखाबाद। केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर शुक्रवार को फर्रुखाबाद में जनपद स्तरीय खरीफ उत्पादकता गोष्ठी एवं प्राकृतिक खेती कार्यशाला-मेला का भव्य आयोजन किया गया। कमालगंज रोड स्थित मधुवन रिसोर्ट में आयोजित कार्यक्रम में किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, प्राकृतिक खेती और विभिन्न सरकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। कार्यक्रम में प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, जबकि अध्यक्षता जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने की।
कार्यक्रम की शुरुआत मंत्री जयवीर सिंह और जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर द्वारा फीता काटकर सूचना विभाग की प्रदर्शनी के उद्घाटन के साथ हुई। प्रदर्शनी में केंद्र एवं प्रदेश सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं को प्रदर्शित किया गया था। दोनों अतिथियों ने प्रदर्शनी का अवलोकन कर योजनाओं के प्रचार-प्रसार की जानकारी ली तथा किसानों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
इसके बाद कृषि, उद्यान, पशुपालन तथा अन्य विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण किया गया। अधिकारियों ने किसानों को विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी और खेती में नई तकनीकों के उपयोग के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में किसानों की भारी भागीदारी देखने को मिली।
उप कृषि निदेशक अरविंद मोहन मिश्र ने किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री कुसुम योजना, कृषि यंत्रीकरण, प्राकृतिक खेती एवं जैविक खेती से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। उन्होंने कहा कि किसान अपनी भूमि के एक हिस्से में प्राकृतिक खेती की शुरुआत कर रसायनमुक्त और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। इससे उत्पादन लागत कम होने के साथ-साथ मिट्टी की गुणवत्ता भी बेहतर बनी रहती है।
मुख्य अतिथि मंत्री जयवीर सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि हरित क्रांति ने देश को खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाया, लेकिन रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से भूमि की उर्वरा शक्ति और मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे गोबर, गौमूत्र, हरी खाद और अन्य प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित खेती को अपनाएं, जिससे स्वस्थ समाज और मजबूत कृषि व्यवस्था का निर्माण हो सके।
जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने कहा कि प्राकृतिक और जैविक खेती भविष्य की आवश्यकता है। इससे किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध होता है, भूमि की उर्वरता बढ़ती है, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलता है और लोगों को स्वास्थ्यवर्धक खाद्यान्न प्राप्त होता है। उन्होंने किसानों से आने वाली पीढ़ियों के हित में प्राकृतिक खेती को अपनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के दौरान किसानों को विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित भी किया गया। मंत्री और जिलाधिकारी ने 8 किसानों को बीज मिनीकिट, 5 किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड तथा प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए 5 किसानों को नैपसेक स्प्रेयर वितरित किए। लाभार्थी किसानों ने सरकार की योजनाओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसी पहलें कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने में सहायक साबित होंगी।
इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी विनोद कुमार गौड़, अमृतपुर विधायक सुशील शाक्य, भाजपा जिलाध्यक्ष फतेहचन्द्र वर्मा, जिला विकास अधिकारी एस.के. तिवारी, जिला कृषि अधिकारी शैलेन्द्र कुमार वर्मा, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।
कार्यक्रम के समापन पर जिलाधिकारी ने किसानों से विभागीय स्टॉलों का भ्रमण कर नई कृषि तकनीकों और सरकारी योजनाओं की जानकारी लेने तथा उनका अधिकतम लाभ उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती और आधुनिक तकनीकों के समन्वय से किसान अपनी आय बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यह आयोजन किसानों को जागरूक करने और टिकाऊ कृषि व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।









































