UP: राम मंदिर चढ़ावा मामले में जांच तेज, चंपत राय से 3 घंटे पूछताछ, 70 लोगों को नोटिस, खंगाले जा रहे बैंक रिकॉर्ड

UP: राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़ी कथित गड़बड़ी की जांच अब और व्यापक हो गई है। मुकदमा दर्ज होने के बाद जांच एजेंसियों ने अपनी कार्रवाई तेज करते हुए राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से करीब तीन घंटे तक पूछताछ की और उनका विस्तृत बयान दर्ज किया। सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ के दौरान उनसे चढ़ावे के प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक निर्णयों से जुड़े कई सवाल किए गए। जांच अधिकारी अब उनके बयान का मिलान अन्य गवाहों और उपलब्ध दस्तावेजों से कर रहे हैं। आवश्यकता पड़ने पर उन्हें दोबारा भी पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है।

70 लोगों को नोटिस, गवाहों के बयान की तैयारी

जांच का दायरा अब ट्रस्ट के अन्य पदाधिकारियों, कर्मचारियों और संबंधित लोगों तक भी पहुंच चुका है। पुलिस ने ट्रस्ट के पूर्व सदस्य अनिल मिश्रा, पदाधिकारी गोपाल राव समेत करीब 70 लोगों को नोटिस जारी किए हैं। इसके अलावा लगभग 140 गवाहों के बयान दर्ज करने की तैयारी चल रही है। जांच टीम मंदिर के कई कर्मचारियों से पूछताछ कर चुकी है, जबकि चढ़ावे की गिनती, सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी से जुड़े करीब 30 अन्य लोगों से भी पूछताछ की जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि पूरी व्यवस्था को समझे बिना मामले की सच्चाई तक पहुंचना संभव नहीं होगा।

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चंपत राय ने क्या कहा?

सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान चंपत राय से पूछा गया कि चढ़ावे की निगरानी कैसे होती थी, कर्मचारियों की जवाबदेही किसके पास थी और पहले यदि कोई शिकायत मिली थी तो उसका समाधान कैसे किया गया। बताया जा रहा है कि उन्होंने जांच अधिकारियों से कहा कि कथित चोरी की घटना में उनकी कोई भूमिका नहीं है। उनका कहना था कि जानकारी मिलते ही संदिग्धों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कराई गई और एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया तत्काल पूरी कराई गई। कर्मचारियों की नियुक्ति को लेकर पूछे गए सवालों पर उन्होंने कथित तौर पर कहा कि नियुक्तियां ट्रस्ट की सामूहिक प्रक्रिया के तहत हुई थीं और इसमें अन्य सदस्यों की भी भागीदारी थी।

बैंक रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन भी जांच के दायरे में

एसआईटी ने जांच को केवल मंदिर परिसर तक सीमित नहीं रखा है। टीम भारतीय स्टेट बैंक की अयोध्या धाम शाखा पहुंची, जहां शाखा प्रबंधक समेत पांच कर्मचारियों से पूछताछ की गई। पुलिस ने चढ़ावे की राशि जमा होने से संबंधित दस्तावेज हासिल किए हैं और आरोपियों के बैंक खातों के साथ पिछले पांच वर्षों का बैंक रिकॉर्ड भी मांगा है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि चढ़ावे की रकम बैंक तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया में कहीं किसी तरह की अनियमितता तो नहीं हुई। वित्तीय दस्तावेजों और मंदिर के रिकॉर्ड का मिलान जांच का अहम हिस्सा माना जा रहा है।

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17 साल से अयोध्या में तैनात RMO का तबादला

जांच के बीच एक और अहम घटनाक्रम सामने आया है। उत्तर प्रदेश पुलिस के वायरलेस विभाग में वर्ष 2009 से अयोध्या में तैनात रेडियो मेंटेनेंस ऑफिसर (RMO) अर्जुन देव का तबादला गोरखपुर कर दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक, मंदिर परिसर में वायरलेस सिस्टम, सीसीटीवी मॉनिटरिंग और काउंटिंग रूम की तकनीकी निगरानी से जुड़ी जिम्मेदारियां भी उनके पास थीं। इसी वजह से एसआईटी सुरक्षा व्यवस्था के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा करते हुए उनकी भूमिका से संबंधित जानकारियां भी जुटा रही है। हालांकि अब तक किसी भी जांच एजेंसी ने उनके खिलाफ किसी प्रकार की आपराधिक जिम्मेदारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और जांच अभी जारी है।

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