500 साल के इंतजार के बाद बना राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्रजहां हर दिन हजारों श्रद्धालु भगवान राम के चरणों में करोड़ों रुपये का चढ़ावा चढ़ाते हैं। लेकिन सोचिए अगर उसी मंदिर के दान को लेकर करोड़ों रुपये के कथित गबन का मामला सामने आ जाए…अगर चोरी के आरोप लगें अगर SIT जांच बैठे अगर FIR दर्ज हो जाए और आखिर में ट्रस्ट के सबसे बड़े पदाधिकारियों में शामिल महासचिव चंपत राय नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे दें तो सवाल सिर्फ पैसों का नहीं रहता सवाल करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का बन जाता है। इस वीडियो में हम आपको बताएंगे कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद कब किसने आरोप लगाए SIT को क्या मिला FIR कैसे दर्ज हुई और आखिर क्यों चंपत राय को इस्तीफा देना पड़ा।
7 जून 2026 यही वो दिन था जब पहली बार यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया। समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक पवन पांडे ने आरोप लगाया कि राम मंदिर के चढ़ावे में लगभग 7 से 7.5 करोड़ रुपये की कथित हेराफेरी हुई है। यह आरोप बेहद गंभीर था क्योंकि यह किसी सरकारी विभाग पर नहीं बल्कि राम मंदिर ट्रस्ट पर लगाया गया था। कुछ ही देर में यह खबर पूरे देश में फैल गई। इसी दिन समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी सोशल मीडिया पर सरकार और ट्रस्ट से सवाल पूछे।
उन्होंने लिखा अगर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ी रकम गायब हुई है तो इसकी न्यायिक जांच होनी चाहिए। उन्होंने अदालत से स्वतः संज्ञान लेने की भी मांग की। यहीं से यह मामला राजनीतिक और राष्ट्रीय बहस का विषय बन गया। 8 और 9 जून अगले दो दिनों में यह मुद्दा सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगा। लाखों लोग सवाल पूछने लगे क्या सच में राम मंदिर के चढ़ावे में गड़बड़ी हुई है? इसी बीच बीजेपी नेता डॉ. रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री कार्यालय यानी PMO को पत्र लिखकर CBI जांच की मांग कर दी।
बताया गया कि प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी ट्रस्ट से इस पूरे मामले पर रिपोर्ट मांगी। अब मामला सिर्फ आरोपों तक सीमित नहीं था। दिल्ली तक इसकी गूंज पहुंच चुकी थी। 10 से 12 जून जैसे-जैसे विवाद बढ़ा राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट सामने आया। महासचिव चंपत राय ने वीडियो जारी किया। उन्होंने कहा दान की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी है। नकदी की गिनती SBI बैंक के कर्मचारियों की मौजूदगी में होती है।
CCTV निगरानी रहती है। और किसी तरह की चोरी या गबन का सवाल ही नहीं उठता। ट्रस्ट ने सभी आरोपों को निराधार बताया। लेकिन विवाद यहीं नहीं रुका। 13 जून लगातार बढ़ते विवाद के बीच 13 जून को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा फैसला लिया। तीन सदस्यीय विशेष जांच दल यानी SIT का गठन कर दिया गया। SIT को साफ निर्देश दिए गए 15 दिनों के भीतर जांच पूरी करके रिपोर्ट सौंपनी होगी। यानी अब आरोप और जवाब से आगे मामला आधिकारिक जांच तक पहुंच चुका था।
14 से 18 जून जांच शुरू होते ही SIT सीधे राम मंदिर पहुंची। दान पेटियां नकदी गिनने की प्रक्रिया सुरक्षा व्यवस्था CCTV फुटेज बैंक रिकॉर्ड दान रजिस्टर हर दस्तावेज की जांच शुरू हुई। ट्रस्ट के कर्मचारियों से पूछताछ हुई। नकदी गिनने वाले कर्मचारियों से सवाल किए गए। महासचिव चंपत राय से भी पूछताछ हुई। ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा से भी जानकारी ली गई। SIT ने कई संदिग्ध लोगों से पूछताछ की।
इसी दौरान सोशल मीडिया पर नए-नए आरोप सामने आने लगे। कहीं कहा गया कि नकदी गायब है… तो कहीं दावा किया गया कि लगभग 60 किलो चांदी की ईंटें और आभूषण भी गायब हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि उस समय नहीं हुई थी। 19 जून जांच के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अयोध्या पहुंचे। और पहली बार सार्वजनिक रूप से इस मामले पर बोले। उन्होंने कहा 500 साल इंतजार किया है 15 दिन और कर लीजिए।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि अगर कोई दोषी है तो वह किसी भी कीमत पर नहीं बचेगा। चाहे कितना भी बड़ा व्यक्ति क्यों न हो। साथ ही उन्होंने लोगों से अपील की बिना सबूत के आरोप न लगाएं अगर किसी के पास सबूत हैं तो उन्हें SIT को सौंपें। 23 और 24 जून करीब दस दिनों की जांच के बाद SIT ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप दी। रिपोर्ट में कथित तौर पर कई प्रशासनिक खामियों की ओर इशारा किया गया। दान प्रबंधन प्रणाली में सुधार की सिफारिश की गई।
कैश हैंडलिंग, रिकॉर्ड मेंटेनेंस, सुरक्षा…और जवाबदेही बढ़ाने के सुझाव दिए गए। यानी जांच एजेंसी ने माना कि व्यवस्था में सुधार की जरूरत है। 25 जून, यही वह दिन था जब मामला एक नए चरण में पहुंच गया। राम जन्मभूमि पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई। ट्रस्ट से जुड़े कृष्ण मोहन की शिकायत पर आठ लोगों को नामजद किया गया। रामाशंकर यादव टिन्नू, अनुकल्प मिश्र , अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय, लवकुश मिश्र , रमा शंकर मिश्र, सुभाष श्रीवास्तव, मनीष कुमार यादव।
FIR में चोरी, आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश जैसी गंभीर धाराएं लगाई गईं। बताया गया कि आरोपी नकदी गिनने वाले कर्मचारी और मंदिर प्रबंधन से जुड़े कुछ लोग थे। पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए नामजद आठों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। कुछ आरोपियों से कथित तौर पर रकम बरामद होने की भी खबरें सामने आईं। 26 जून FIR दर्ज होने के अगले ही दिन सबसे बड़ा घटनाक्रम हुआ। राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने नैतिक आधार पर अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
उनके साथ ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने भी पद छोड़ दिया। ध्यान देने वाली बात यह है, FIR में दोनों के नाम नहीं थे। लेकिन SIT ने दोनों से पूछताछ की थी। और पूरे विवाद में ट्रस्ट की जवाबदेही पर लगातार सवाल उठ रहे थे। ऐसे में उनके इस्तीफे ने पूरे मामले को और बड़ा बना दिया। 60 किलो चांदी का सच क्या निकला? सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा चर्चा 60 किलो चांदी की ईंटों को लेकर हुई। लेकिन SIT की जांच में अलग तस्वीर सामने आई।
जांच के मुताबिक ट्रस्ट के रिकॉर्ड में चांदी का पूरा विवरण मौजूद था। रिकॉर्ड के अनुसार 21 जुलाई और 28 जुलाई 2020 के बीच लगभग 38 किलोग्राम चांदी दान में मिली थी। इसके बाद 29 जुलाई 2020 को लगभग 25.5 किलोग्राम अतिरिक्त चांदी प्राप्त हुई। SIT ने कहा इन चांदी की ईंटों को गलाकर बैंक लॉकर में सुरक्षित रखा गया है। यानी जांच में फिलहाल चांदी गायब होने की पुष्टि नहीं हुई।
अब सबसे बड़ा सवाल इस पूरे विवाद ने करोड़ों श्रद्धालुओं के मन में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर व्यवस्था मजबूत थी तो FIR तक नौबत क्यों आई? अगर गड़बड़ी नहीं थी तो SIT ने सुधार की सिफारिश क्यों की? अगर सब कुछ सही था तो महासचिव चंपत राय ने नैतिक आधार पर इस्तीफा क्यों दिया? इन सवालों के अंतिम जवाब अभी जांच और अदालत की प्रक्रिया के बाद ही पूरी तरह सामने आएंगे।
राम मंदिर सिर्फ एक मंदिर नहीं, करोड़ों लोगों की आस्था का प्रतीक है। ऐसे में यहां चढ़ाए गए हर रुपये और हर दान की पारदर्शिता उतनी ही जरूरी है। जितनी श्रद्धालुओं की आस्था। फिलहाल जांच जारी है FIR दर्ज हो चुकी है गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और ट्रस्ट में बड़े बदलाव भी शुरू हो चुके हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि आगे जांच क्या नया खुलासा करती है, और क्या इस पूरे मामले में और बड़े नाम सामने आते हैं या नहीं।
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