UP: अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावा चोरी प्रकरण की एसआईटी जांच के बीच श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बड़े बदलाव के संकेत मिलने लगे हैं। मामले में आठ आरोपितों के जेल भेजे जाने और दो प्रमुख ट्रस्टियों के इस्तीफे के बाद ट्रस्ट के पुनर्गठन की संभावनाएं मजबूत मानी जा रही हैं। अब 11 जुलाई को प्रस्तावित ट्रस्ट की त्रैमासिक बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है, जहां भविष्य की दिशा तय हो सकती है।
एसआईटी ने प्रशासनिक सीईओ की नियुक्ति का दिया सुझाव
विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में ट्रस्ट के ढांचे में सुधार की जरूरत बताते हुए किसी अनुभवी प्रशासनिक अधिकारी को मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) नियुक्त करने की सिफारिश की है। माना जा रहा है कि केंद्र सरकार बैठक से पहले इस संबंध में अंतिम निर्णय ले सकती है। हालांकि वर्तमान ट्रस्ट नियमावली में सीईओ का पद नहीं है, इसलिए नियुक्ति से पहले उपविधि (बायलॉज) में संशोधन आवश्यक होगा।
चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्र के इस्तीफे से बढ़ी हलचल
एफआईआर दर्ज होने और आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य डॉ. अनिल कुमार मिश्र पर इस्तीफे का दबाव बढ़ गया था। बताया जा रहा है कि विभिन्न घटनाक्रमों और बढ़ते विवाद के बीच दोनों ने अपना त्यागपत्र सौंप दिया है। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरि ने आधिकारिक पत्र जारी कर इसकी पुष्टि की, जबकि ट्रस्टी स्वामी विश्वप्रसन्नतीर्थ ने कहा कि इन इस्तीफों पर अंतिम निर्णय 11 जुलाई की बैठक में लिया जाएगा।
नए सीईओ के लिए दो पूर्व अधिकारियों के नाम चर्चा में
ट्रस्ट में संभावित सीईओ नियुक्ति को लेकर दो सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारियों के नाम चर्चा में हैं। इनमें राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र का नाम पहले से ही सामने आ रहा था, जबकि अब पूर्व आईएएस अधिकारी योगेश्वरराम मिश्र का नाम भी प्रमुखता से लिया जा रहा है। अयोध्या के पूर्व जिलाधिकारी रह चुके योगेश्वरराम मिश्र वर्तमान में उत्तर प्रदेश राज्य लोकसेवा अधिकरण में सदस्य (प्रशासनिक) के पद पर कार्यरत हैं।
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ट्रस्ट में कई पद हो सकते हैं खाली, नए चेहरों की संभावना
यदि दोनों ट्रस्टियों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए जाते हैं तो ट्रस्ट में तीन पद रिक्त हो जाएंगे। एक पद पहले से ही पूर्व ट्रस्टी बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र के निधन के बाद खाली है। इसके अलावा ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास, वरिष्ठ सदस्य के. परासरण और कुछ अन्य ट्रस्टी उम्र व स्वास्थ्य कारणों से सक्रिय भूमिका नहीं निभा पा रहे हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि पुनर्गठन की स्थिति में ट्रस्ट में नए सदस्यों को शामिल करने पर भी गंभीरता से विचार किया जा सकता है।
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