आगर: एसएन मेडिकल कॉलेज के बाहर प्राइवेट एंबुलेंस का जमावड़ा जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। सरकारी अस्पताल के बाहर लंबे समय से कई प्राइवेट एंबुलेंस खड़ी दिखाई दे रही हैं। इनमें कुछ ऐसी भी हैं, जिनकी स्थिति और संचालन व्यवस्था को देखकर नियमों के पालन पर सवाल उठना लाजिमी है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग और आरटीओ की ओर से प्रभावी कार्रवाई नजर नहीं आ रही है।
नियमों को लेकर विभागीय अधिकारी समय-समय पर सख्ती का दावा करते हैं। अभियान चलाए जाते हैं, जांच की बात होती है और कार्रवाई के निर्देश भी दिए जाते हैं, लेकिन एसएन मेडिकल कॉलेज के बाहर की तस्वीर इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। सवाल यह है कि जब अस्पताल के बाहर प्राइवेट एंबुलेंस खुलेआम खड़ी हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों की नजर इन पर क्यों नहीं पड़ रही?
हादसा होने पर दौड़ लगाते हैं अधिकारी
किसी हादसे या गंभीर शिकायत के बाद विभागीय अधिकारी सक्रिय होते हैं। मौके पर पहुंचकर जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है। लेकिन सवाल यह है कि हादसा होने का इंतजार क्यों किया जाता है? समय रहते नियमों का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
किसकी शह पर चल रहा खेल?
अस्पताल के बाहर प्राइवेट एंबुलेंस के लंबे समय से जमावड़े को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर किसकी शह पर यह व्यवस्था चल रही है। यदि नियमों का उल्लंघन हो रहा है तो इन्हें सरकारी अस्पताल के बाहर से हटाने में विभाग क्यों नाकाम है?
हादसा हुआ तो जिम्मेदार कौन?
यदि किसी अव्यवस्थित या नियम विरुद्ध खड़ी एंबुलेंस से हादसा होता है अथवा मरीज की जान जोखिम में पड़ती है तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? विभागों की कथित खानापूर्ति पर अब कार्रवाई की जरूरत है। हादसे के बाद जागने से बेहतर है कि जिम्मेदार अधिकारी समय रहते कार्रवाई करें।



















































