कोडीन कफ सिरप पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, मेडिकल इस्तेमाल पर छूट लेकिन नशे में उपयोग पर NDPS Act लागू

कोडीन कफ सिरप के अवैध डायवर्जन और नशीले पदार्थ के तौर पर इस्तेमाल के मामलों में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण कानूनी व्यवस्था दी है। न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की पीठ ने समान कानूनी सवालों से जुड़ी 77 जमानत अर्जियों का निस्तारण किया। इनमें 63 अर्जियां मंजूर हुईं, जबकि 14 को खारिज कर दिया गया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि तय सीमा में कोडीन वाली कफ सिरप तभी NDPS Act से बाहर रहेगी, जब उसका इस्तेमाल और कारोबार वास्तविक रूप से औषधीय उद्देश्य के लिए किया जा रहा हो।

मेडिकल इस्तेमाल पर छूट, नशे के लिए इस्तेमाल पर NDPS Act लागू

हाईकोर्ट ने कहा कि New Phensedyl और Eskuf जैसी कोडीन युक्त कफ सिरप में कोडीन की मात्रा 14 नवंबर 1985 की केंद्रीय अधिसूचना के Entry 35 में तय सीमा के भीतर होने पर भी हर परिस्थिति में NDPS Act से छूट नहीं मिलती। यदि ऐसी दवा का स्टॉक, बिक्री या परिवहन नशे अथवा चिकित्सीय उपयोग से इतर उद्देश्य के लिए किया जाता है, तो उसे manufactured drug माना जा सकता है और NDPS Act के प्रावधान लागू होंगे। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि केवल वैध Drug License होना NDPS Act के तहत स्वतः सुरक्षा की गारंटी नहीं है।

पूरे मिश्रण के वजन से तय होगी मात्रा

अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के Hira Singh फैसले का हवाला देते हुए कहा कि किसी मिश्रण या तैयारी में मौजूद narcotic substance की मात्रा तय करते समय केवल वास्तविक कोडीन की मात्रा नहीं, बल्कि पूरे mixture/preparation का वजन देखा जाएगा। यदि बरामद कफ सिरप की कुल मात्रा एक किलोग्राम से अधिक है, तो उसे commercial quantity माना जा सकता है और NDPS Act की धारा 37 के तहत जमानत के लिए कड़े प्रावधान लागू होंगे। हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि हर Drug License उल्लंघन अपने आप NDPS Act का अपराध नहीं बनता।

बड़े पैमाने पर संदिग्ध बिक्री और डायवर्जन पर कोर्ट की कड़ी नजर

जमानत मामलों की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कई मामलों में ई-वे बिल और वास्तविक परिवहन के रिकॉर्ड में गंभीर अंतर पाया। एक मामले में 2,49,000 बोतल कोडीन कफ सिरप की खरीद-बिक्री दिखाई गई, लेकिन टोल प्लाजा की रिपोर्ट से वास्तविक डिलीवरी का प्रमाण नहीं मिला। कथित खरीदारों के पास भी संबंधित स्टॉक और दस्तावेज नहीं मिले। वहीं, उसी स्टॉक की बड़ी मात्रा त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल में नशीले इस्तेमाल के लिए ले जाते समय बरामद होने की बात सामने आई। ऐसे मामलों में अदालत ने जमानत देने से इनकार किया।

ड्रग विभाग की कार्रवाई पर भी हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी

उत्तर प्रदेश की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एवं अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने आवेदकों की दलीलों का विरोध करते हुए NDPS Act, केंद्रीय अधिसूचना और सुप्रीम कोर्ट के Mohd. Sahabuddin, Hira Singh और Raj Kumar Arora जैसे फैसलों का हवाला दिया। वहीं, हाईकोर्ट ने Drug Department की कार्यप्रणाली पर भी चिंता जताई और कहा कि कई मामलों में मामूली लाइसेंस उल्लंघनों पर भी NDPS Act के तहत FIR दर्ज कर दी गई। कोर्ट ने FSDA के आयुक्त को मामले की समीक्षा कर Drug Inspectors को FIR दर्ज करने की उचित प्रक्रिया के संबंध में दिशा-निर्देश जारी करने को कहा। फैसले के जरिए अदालत ने वैध चिकित्सीय उपयोग वाली दवाओं को अनावश्यक NDPS कार्रवाई से बचाने के साथ-साथ उनके नशीले पदार्थ के रूप में अवैध डायवर्जन पर सख्ती का रास्ता भी स्पष्ट किया है।

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