बाराबंकी: लखनऊ-बहराइच राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित संजय सेतु एवं एल्गिन ब्रिज के समीप केंद्रीय जल आयोग के कार्यालय के पास प्रवाहित घाघरा नदी का जलस्तर शुक्रवार को एक बार फिर खतरे के लाल निशान से ऊपर पहुंच गया। केंद्रीय जल आयोग के कर्मचारी पवन कुमार के अनुसार शुक्रवार सुबह 8 बजे नदी का जलस्तर 106.300 मीटर दर्ज किया गया। खतरे का लाल निशान 106.070 मीटर है। इस तरह नदी करीब 23 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी होने से तराई क्षेत्र में रहने वाले ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है।
गुरुवार शाम छह बजे घाघरा नदी का जलस्तर 106.200 मीटर दर्ज किया गया था, जो खतरे के निशान से 13 सेंटीमीटर ऊपर था। इसके बाद शुक्रवार सुबह जलस्तर में और वृद्धि दर्ज की गई। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव बना हुआ है और फिलहाल पानी लगातार बढ़ने की स्थिति में है। इससे नदी के आसपास बसे गांवों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है।
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घाघरा के बढ़ते जलस्तर को लेकर हेतमापुर, सुंदरनगर, तपेशीपाह, दुर्गापुर, सिसौंडा, लहड़रा, केशियापुर और मथुरापुरवा समेत दर्जनों ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों में भय व्याप्त है। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो नदी का पानी निचले इलाकों में पहुंच सकता है और खेतों के साथ-साथ आबादी को भी प्रभावित कर सकता है।
बताया जा रहा है कि नेपाल क्षेत्र से आने वाले पानी के साथ शारदा और गिरिजा बैराजों से लगातार पानी छोड़े जाने का असर घाघरा नदी के जलस्तर पर पड़ रहा है। पानी की आवक बढ़ने से नदी उफान पर है। ग्रामीण नदी के जलस्तर पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। बढ़ते जलस्तर ने प्रशासन के सामने भी तराई क्षेत्र में निगरानी और संभावित बाढ़ से निपटने की चुनौती बढ़ा दी है।


















































