गुजरात स्थापना दिवस की पूर्व संध्या पर गृह विज्ञान विभाग में पारंपरिक व्यंजनों की भव्य प्रदर्शनी—संस्कृति और पोषण का संगम

गोरखपुर : गुजरात स्थापना दिवस की पूर्व संध्या (30 अप्रैल 2026) के अवसर पर दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के गृह विज्ञान विभाग में पारंपरिक गुजराती व्यंजनों की एक भव्य, आकर्षक एवं ज्ञानवर्धक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल के मार्गदर्शन तथा विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर पूनम टंडन के नेतृत्व में संपन्न हुआ। आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, क्षेत्रीय खाद्य विविधता तथा पोषण विज्ञान से जोड़ना था। प्रदर्शनी में छात्र-छात्राओं ने अत्यंत रचनात्मकता के साथ गुजरात के प्रसिद्ध व्यंजनों—ढोकला, थेपला, फाफड़ा, जलेबी,गाडियां, कचौरी एवं पोहा आदि को तैयार कर आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया।

गुजरात की खाद्य संस्कृति उसकी जलवायु, व्यापारिक जीवनशैली और धार्मिक मान्यताओं से गहराई से जुड़ी है। यहां के व्यंजनों में मीठा, नमकीन और खट्टा स्वाद एक साथ संतुलित रूप में मिलता है, जो “संतुलित जीवन शैली” का प्रतीक माना जाता है।

* ढोकला और खांडवी जैसे किण्वित खाद्य पदार्थ सामाजिक मेलजोल और अतिथि सत्कार का प्रतीक हैं।
* थेपला यात्रा और दैनिक जीवन में उपयोगी भोजन है, जो गुजरात की व्यावहारिकता को दर्शाता है।
* फाफड़ा-जलेबी जैसे संयोजन त्योहारों और विशेष अवसरों की पहचान हैं।

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इस प्रकार विद्यार्थियों ने यह दर्शाया कि भोजन केवल स्वाद नहीं, बल्कि संस्कृति, परंपरा और सामाजिक पहचान का महत्वपूर्ण माध्यम है।
प्रदर्शनी की विशेषता यह रही कि प्रत्येक व्यंजन के साथ उसके पोषण मूल्य, निर्माण विधि और स्वास्थ्य लाभों की जानकारी भी दी गई।

* ढोकला: किण्वन प्रक्रिया के कारण यह प्रोटीन और प्रोबायोटिक्स से भरपूर होता है, जो पाचन को बेहतर बनाता है।
* थेपला: मेथी, गेहूं और मसालों से बना यह व्यंजन फाइबर, आयरन और विटामिन का अच्छा स्रोत है।
* फाफड़ा एवं गाठिया: ऊर्जा देने वाले स्नैक्स हैं, जो सीमित मात्रा में शरीर को त्वरित ऊर्जा प्रदान करते हैं।
* जलेबी: उच्च कार्बोहाइड्रेट वाला व्यंजन, जो त्योहारों में ऊर्जा का स्रोत बनता है।

विद्यार्थियों ने यह भी बताया कि गुजराती भोजन में कम तेल, संतुलित मसाले और किण्वन तकनीक का उपयोग इसे स्वास्थ्यवर्धक बनाता है.

इस प्रदर्शनी को एक इंटीग्रेटेड लर्निंग एक्सपीरियंस के रूप में प्रस्तुत किया गया, जिसमें—

* फूड साइंस, न्यूट्रिशन और संस्कृति को एक साथ जोड़ा गया
* चार्ट, मॉडल और लाइव डेमोंस्ट्रेशन के माध्यम से जानकारी दी गई
* विद्यार्थियों ने टीमवर्क, प्रस्तुति कौशल और स्वच्छता मानकों का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया.

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इस अवसर पर कुलपति प्रोफेसर पूनम टंडन ने कहा—
“भारत की सांस्कृतिक विविधता उसकी सबसे बड़ी शक्ति है, और भोजन उस विविधता का जीवंत स्वरूप है। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को न केवल ज्ञान देते हैं, बल्कि उन्हें अपनी परंपराओं पर गर्व करना भी सिखाते हैं।”

कार्यक्रम संयोजक एवं विभागाध्यक्ष प्रोफेसर दिव्या रानी सिंह ने अपने संक्षिप्त वक्तव्य में कहा—
“यह प्रदर्शनी विद्यार्थियों के लिए सांस्कृतिक ज्ञान और पोषण शिक्षा का उत्कृष्ट माध्यम है। गुजराती व्यंजनों के माध्यम से छात्रों ने न केवल परंपरा को समझा, बल्कि उनके स्वास्थ्यवर्धक गुणों को भी जाना।”

विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर नंदिता आई.पी. सिंह ने भी विद्यार्थियों की रचनात्मकता और प्रस्तुति कौशल की सराहना की।

गृह विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रोफेसर दिव्या रानी सिंह के कुशल निर्देशन में आयोजित यह प्रदर्शनी अत्यंत सफल रही। यह आयोजन केवल व्यंजनों का प्रदर्शन नहीं, बल्कि संस्कृति, पोषण और शिक्षा का समन्वय था।
इस कार्यक्रम के दौरान गृह विज्ञान विभाग की छात्राएं सत्यांशी चतुर्वेदी, प्रिंस, वैभवी, आयुशी, अंकिता, शालिनी, आंचल, अंशिका, अपूर्वा तथा गृह विज्ञान विभाग की शिक्षिकाएं डॉ अनुपमा कौशिक, डॉ नीता सिंह, गार्गी पांडे तथा गरिमा यादव एवं विभाग की शोधार्थियां उपस्थित रहे।

इस कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को भारतीय खाद्य परंपराओं की गहराई को समझने, अपने कौशल को विकसित करने और भविष्य में पोषण एवं खाद्य विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा प्रदान की। यह प्रदर्शनी वास्तव में “विविधता में एकता” की भावना का सजीव उदाहरण बनकर उभरी।

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