UP: रायबरेली में खाद्य सुरक्षा विभाग की छापेमारी को लेकर जिलाधिकारी सरनीत कौर ने नई व्यवस्था लागू की है। अब होटल, रेस्टोरेंट और मिठाई की दुकानों पर जांच करने पहुंचने वाली हर टीम के सदस्यों के लिए आधिकारिक पहचान पत्र पहनना अनिवार्य कर दिया गया है। इस फैसले से जांच प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने की कोशिश की गई है।
फर्जी अधिकारियों और अवैध वसूली पर लगेगी रोक
त्योहारों और विशेष अवसरों पर कई बार फर्जी अधिकारी बनकर कुछ लोग दुकानदारों से अवैध वसूली करने की शिकायतें सामने आती रही हैं। जिलाधिकारी के इस आदेश के बाद अब बिना पहचान पत्र के कोई भी व्यक्ति खाद्य सुरक्षा विभाग का अधिकारी बनकर कार्रवाई नहीं कर सकेगा। इससे व्यापारियों में भ्रम की स्थिति भी खत्म होगी।
आई-कार्ड में होगी पूरी जानकारी
जांच टीम के प्रत्येक सदस्य के आई-कार्ड पर उसका नाम, विभाग द्वारा प्रमाणित नवीनतम फोटो और पदनाम स्पष्ट रूप से दर्ज रहेगा। दुकानदार और प्रतिष्ठान संचालक सबसे पहले अधिकारी की पहचान सुनिश्चित कर सकेंगे और उसके बाद ही जांच प्रक्रिया में सहयोग करेंगे।
मिलावटखोरों के खिलाफ अभियान रहेगा जारी
जिलाधिकारी सरनीत कौर ने स्पष्ट किया है कि खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। औचक निरीक्षण और सैंपलिंग की प्रक्रिया पहले की तरह चलती रहेगी, लेकिन अब पूरी टीम निर्धारित नियमों और पहचान के साथ ही मैदान में उतरेगी।
व्यापारियों और आम लोगों ने फैसले का किया स्वागत
प्रशासन के इस कदम को व्यापार मंडल और आम जनता ने सकारात्मक पहल बताया है। लोगों का मानना है कि इससे जहां एक ओर ईमानदार कारोबारियों को राहत मिलेगी, वहीं दूसरी ओर मिलावट और फर्जीवाड़े पर प्रभावी अंकुश लगाने में भी मदद मिलेगी। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नई व्यवस्था का असर जमीनी स्तर पर कितना दिखाई देता है।
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