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कानपुर शूटआउट: हत्या के बाद एक के ऊपर एक रखे पुलिसकर्मियों के शव, केरोसीन डालकर जलाने की थी तैयारी तभी…

कानपुर शूटआउट केस के बारे में अब तक हर किसी ने सुना है, लेकिन कई ऐसी बातें हैं जो जमीनी स्तर पर पता लग रही है। जैसे कि, हमले के समय ग्रामीणों ने भी बदमाशों का साथ दिया था। जब पुलिसकर्मियों ने मदद मांगने के लिए दरवाजा खटखटाया तो किसी ने उनकी मदद नहीं की। इसके साथ ही पहले ही गांव की स्ट्रीट लाइट बन्द कर दी गईं थीं ताकि पुलिसकर्मी बच ना पाएं।


साजिश के साथ हुआ था हमला

जानकारी के मुताबिक, विकास दुबे ने पुलिसकर्मियों पर हमले के साथ बदमाशों ने बड़ी साजिश भी रची थी। वो पुलिसकर्मियों को मारकर शव जलाने के प्रयास में थे। इसीलिए एक के ऊपर एक रखकर शवों के ढेर लगा दिए थे। पुलिस की गाड़ियों को भी फूंकने की तैयारी थी। मगर तभी भारी पुलिस बल पहुंच गया और बदमाश फरार हो गए। गांव की सड़कें खून से रंगी थीं।


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घायल पुलिसकर्मियों की मानें तो जैसे ही पुलिस टीम दबिश को पहुंची, वैसे ही ग्रामीणों ने पूरे गांव की स्ट्रीट लाइटों को बंद कर दिया था। इससे पुलिसकर्मी समझ ही नहीं पा रहे थे कि उनको भागना किधर है। दूसरी तरफ बदमाशों को गांव का एक-एक कोना पहचाना हुआ था। पुलिस को इस तरह के भीषण हमले का अंदाजा नहीं था इसलिए उनकी उंगलियां असलहों के ट्रिगर पर नहीं थीं। मदद के लिए पुलिसकर्मियों ने कई दरवाजे खटखटाए लेकिन कोई जबाव नहीं आया।


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सीओ और एसओ ने संभाला था मोर्चा

जब ग्रामीणों से कोई मदद नहीं मिली तो सीओ देवेंद्र मिश्र और एसओ महेश यादव के अलावा अन्य पुलिसकर्मियों ने मोर्चा संभाला। जब सामने से अंधाधुंध गोली चली तो पुलिसकर्मियों ने असलहे निकालकर जवाबी फायरिंग की मगर बदमाश इतनी अधिक संख्या में थे कि पुलिसकर्मी कम पड़ गए। देखने से पता चलता है कि किस तरह से पुलिसकर्मी खून से लथपथ होकर जान बचाने को इधर-उधर भागते रहे। हालात बयां कर रहे थे कि किस कदर पुलिसकर्मियों पर बर्बरता हुई है।


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