2 जून, 2025….रात का वक्त। पटना का मुसल्लहपुर हाट। बिहार का सबसे बड़ा कोचिंग हब। वो जगह जहां लाखों स्टूडेंट्स हर साल आते हैं, छोटी-छोटी रूम्स में रहते हैं, 3,000 रुपये महीने घर से मंगवाते हैं, और सपना देखते हैं एक सरकारी नौकरी का। इस रात एक पोस्टर लगा…सिर्फ एक पोस्टर। लिखा था  “12,000 स्टूडेंट्स सेलेक्टेड।” और उस पोस्टर के बाद जो हुआ  वो बिहार की एजुकेशन हिस्ट्री का सबसे डार्क चैप्टर बन गया। पत्थरबाजी। साइनबोर्ड तोड़े गए। सिक्योरिटी गार्ड्स ने गोलियां चलाईं। एफआईआर। अरेस्ट। एक कोचिंग ओनर जेल में। दूसरे के खिलाफ अरेस्ट वारंट। एक पोस्टर के लिए  गोलियां।

लेकिन ये कहानी सिर्फ एक रात की नहीं है। ये कहानी है एक आदमी की  जिसने 40 रुपये डेली कमाने से शुरू किया। 6 स्टूडेंट्स से शुरू किया। यूट्यूब पर एक बेसिक फोन से वीडियोज अपलोड किए। और आज  26 मिलियन सब्सक्राइबर्स, 46 करोड़ की नेट वर्थ, पटना से दिल्ली तक कोचिंग सेंटर्स, और इंडिया के सबसे पावरफुल एजुकेटर का टैग। लेकिन उस पावर के साथ आया कुछ और भी  ट्रेनों में आग, अस्पताल में एडमिशन, पुलिस केस, और अब… गोलियां। ये है खान सर की कहानी। और ये कहानी एक सवाल पूछती है जब एक टीचर इतना पावरफुल हो जाए, तो वो टीचर रहता है… या कुछ और बन जाता है?

कहानी शुरू होती है यूपी से। फैसल खान… देवरिया डिस्ट्रिक्ट, उत्तर प्रदेश। गोरखपुर डिवीजन। मिडिल-क्लास फैमिली। फादर कॉन्ट्रैक्टर। बचपन में आर्मी जॉइन करना चाहते थे  बाद में यूपीएससी की तरफ गए। इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से बी.एससी. किया। जियोग्राफी में मास्टर्स। यूपीएससी की तैयारी की। क्लियर नहीं हुआ। और फिर 2017 में एक डिसीजन लिया  पटना जाएंगे। बिहार में कोचिंग करवाएंगे। यहां एक डिटेल है जो बहुत लोग नहीं जानते। जब फैसल खान पटना में कमरा ढूंढने गए तो एक जगह उन्हें कमरा देने से मना कर दिया गया। वजह? उनका धर्म।

उस एक्सपीरियंस के बाद उन्होंने डिसाइड किया मैं यहीं रह के काम करूंगा। एजुकेशन का काम। शुरू किए  6 स्टूडेंट्स। एक छोटा कमरा। बिहार पुलिस एग्जाम की तैयारी करवाते थे। डेली कमाई  40 रुपये। बस का किराया  90 रुपये। तो घर कैसे जाते थे? पैदल। 40 रुपये कमाते हो। 90 का टिकट नहीं ले सकते। तो 2017 में फैसल खान  रोज पैदल घर जाते थे। लेकिन उनकी टीचिंग स्टाइल में कुछ था। हिंदी मीडियम। देसी एग्जाम्पल्स। ह्यूमर। कॉम्प्लेक्स चीजें सिंपल लैंग्वेज में। स्टूडेंट्स ने बात फैलाई 6 से 40 हुए. 40 से 150 और 150 से हजारों।

अप्रैल 2019 में एक यूट्यूब चैनल बनाया  “खान जीएस रिसर्च सेंटर।” बेसिक फोन से। कैमरा? नहीं था। एडिटिंग? नहीं थी। बस क्लास रिकॉर्ड की, अपलोड की। और फिर मार्च 2020 में  कोविड आया। इंडिया लॉक हो गया। कोचिंग सेंटर्स बंद हो गए। और बिहार-यूपी के वो लाखों स्टूडेंट्स जो फोन पर कभी पढ़े नहीं थे सडनली यूट्यूब पर क्लास ढूंढने लगे। खान सर की वीडियोज उन्हें मिल गईं।

रिजल्ट? एक महीने में 10 लाख सब्सक्राइबर्स। इंडिया के एजुकेशन यूट्यूब में ऐसा किसी चैनल के साथ नहीं हुआ था। आज वो चैनल 26 मिलियन सब्सक्राइबर्स पर है। नेट वर्थ के एस्टिमेट्स 40 से 50 करोड़ के बीच हैं। पटना में मल्टिपल सेंटर्स। दिल्ली के करोल बाग और मुखर्जी नगर में सेंटर्स। प्रयागराज। देहरादून। एक एजुकेशन ऐप। बुक्स। और फीस? 5,000 से 15,000 रुपये पर कोर्स। बिहार के सबसे सस्ते कोचिंग सेंटर्स में से एक।

40 रुपये की डेली कमाई से 46 करोड़ का एम्पायर। लेकिन एम्पायर के साथ एक चीज और आती है…पैसा। बहुत ज्यादा पैसा…. और जब पैसा आता है तो टेस्ट भी आता है। 2021-22 का इंडिया याद करिए। एडटेक का गोल्डन एरा। बायजूज़ की वैल्यूएशन 1 लाख करोड़ पार कर चुकी थी। अनएकेडमी, फिजिक्सवाला, वेदांतु — सब रेस में थे। सबको चाहिए था एक चीज- स्टार टीचर्स। ब्रांडेड चेहरे जो स्टूडेंट्स खींच के लाएं। और एक ऑफर आया खान सर के पास। रिपोर्टेडली  107 करोड़ रुपये। एक बार फिर 107 करोड़। जॉइन करो। हमारे प्लेटफॉर्म पर पढ़ाओ। तुम्हारा ब्रांड, हमारा रीच।

अब एक सेकंड सोचिए। एक इंसान जो 5 साल पहले 40 रुपये डेली कमाता था  उसके सामने 107 करोड़ का ऑफर है। ये लाइफ-चेंजिंग नहीं है। ये जेनरेशनल वेल्थ है। आपके बच्चे के बच्चे सेट हो जाएं  इतना पैसा। खान सर ने कहा  नहीं। उनकी वजह थी  अगर कॉरपोरेट प्लेटफॉर्म पर जाऊंगा, तो फीस बढ़ेगी। 5,000 की जगह 50,000 लगेगा। और मेरे स्टूडेंट्स  जो बिहार के गांव से आते हैं, जो 3,000 रुपये महीने पर पटना में सर्वाइव करते हैं  वो अफोर्ड नहीं कर पाएंगे।

बायजूज़  वो 1 लाख करोड़ की कंपनी  2024 में इनसॉल्वेंसी में गई। जीरो वैल्यूएशन। जीरो एम्प्लॉइज़। बंद… खत्म। अनएकेडमी की रेवेन्यू 988 करोड़ लॉस 628 करोड़। और खान सर? अपनी 5,000 की फीस के साथ  खड़े हैं। स्टूडेंट्स लॉयल…. ब्रांड और भी स्ट्रॉन्ग। 107 करोड़ ठुकराना  अगर ये सच है तो इसको कोई भी इंस्पायरिंग कहेगा। लेकिन कहानी यहां नहीं रुकती। क्योंकि जब आपकी क्लास में हजारों स्टूडेंट्स बैठते हैं, जब आपका एक वीडियो लाखों लोगों तक पहुंचता है, जब आपकी एक बात पर लोग सड़क पर उतर आते हैं  तो आप सिर्फ टीचर नहीं रहते।

आप एक फोर्स बन जाते हो। और उस फोर्स का इस्तेमाल  2022 में पहली बार दिखा। रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड का एनटीपीसी एग्जाम  नॉन-टेक्निकल पॉपुलर कैटेगरीज। सीबीटी-1 के रिजल्ट्स आए 15 जनवरी को। स्टूडेंट्स का एलीगेशन सीरियस था  इंटरमीडिएट पास और ग्रेजुएट दोनों को सेम पेपर दिया गया। ग्रेजुएट स्टूडेंट्स को अनफेयर एडवांटेज मिला। ये एग्जाम फेयर नहीं था। और फिर खान सर ने एक वीडियो अपलोड किया। उस वीडियो में  रिपोर्टेडली  उन्होंने स्टूडेंट्स को कहा कि अगर एग्जाम कैंसल नहीं होता, तो सड़क पर आओ। प्रोटेस्ट करो।

15 जनवरी को रिजल्ट्स आए। 24 जनवरी से प्रोटेस्ट्स शुरू हुए। जो हुआ  वो शॉकिंग था। पटना की सड़कें जलीं। अशोक राजपथ पर  जो पटना के सबसे बड़े हॉस्पिटल, सबसे पुराने स्कूल्स और कॉलेजों के रास्ते पर है टायर्स जलाए गए। ट्रैफिक ठप। राजेंद्र नगर टर्मिनल पर स्टूडेंट्स ने रेलवे ट्रैक ब्लॉक किया। और गया में  एक पैसेंजर ट्रेन को आग लगा दी। आग। एक ट्रेन में… स्टूडेंट्स ने पत्थरबाजी की… रेलवे प्रॉपर्टी का वैंडलिज्म। बिहार बंद।

16 कोचिंग टीचर्स के खिलाफ एफआईआर। 400 से ज्यादा अनआइडेंटिफाइड लोगों के खिलाफ एफआईआर। खान सर का नाम  एफआईआर में। पत्रकार नगर पुलिस स्टेशन, पटना। खान सर का रिस्पॉन्स था  “अगर मेरा रोल है हिंसा में तो मुझे अरेस्ट करो।” उनका कहना था कि फॉल्ट आरआरबी का है जिन्होंने अनफेयर एग्जाम डिजाइन किया। लेकिन सवाल ये है एक वीडियो। एक टीचर का एक वीडियो। और उसके बाद  ट्रेनें जलीं, ट्रैक्स ब्लॉक हुए, पत्थरबाजी, बंद।

क्या एक टीचर इतना पावरफुल हो सकता है कि उसकी एक बात पर सिस्टम रुक जाए? 2022 में ये सवाल पूछा गया। 2024 में — इसका जवाब मिल गया। अब तक जो सुना  6 स्टूडेंट्स, 107 करोड़ का रिजेक्शन, ट्रेनों में आग ये सब सिर्फ कॉन्टेक्स्ट था। असली कहानी अब शुरू होती है। दिसंबर 2024। बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन  बीपीएससी  का 70वां प्रीलिमिनरी एग्जाम। तारीख थी 13 दिसंबर। बीपीएससी ने एक रूल चेंज अनाउंस किया नॉर्मलाइजेशन प्रोसेस लागू होगा।

मतलब अगर एग्जाम अलग-अलग शिफ्ट्स में हो, तो मार्क्स को एक स्टैटिस्टिकल फॉर्मूला से इक्वलाइज करेंगे। स्टूडेंट्स की डिमांड —नहीं चाहिए नॉर्मलाइजेशन। एक शिफ्ट, एक पेपर। पुराना सिस्टम रखिए। 6 दिसंबर। बीपीएससी ऑफिस के पास, गर्दनीबाग एरिया। स्टूडेंट्स ने धरना दिया। पुलिस ने लाठीचार्ज किया। बेली रोड पर ट्रैफिक ब्लॉक हुआ। स्टूडेंट लीडर अरेस्ट हुआ। और फिर खान सर पहुंचे। वो प्रोटेस्ट में शामिल हुए। स्टूडेंट्स के साथ खड़े हुए। उनका क्लेम था  एग्जाम लीक हुआ है। और उनके पास एविडेंस है। कोर्ट जाएंगे। प्रूव करेंगे।

पुलिस ने उन्हें ब्रीफली डिटेन किया। उनकी तबीयत बिगड़ गई डिहाइड्रेशन, बुखार। हॉस्पिटल में एडमिट हुए। सोशल मीडिया पर रूमर्स फैले  खान सर अरेस्टेड। बिहार पुलिस ने डिनाय किया  नहीं, वो खुद आए थे पुलिस स्टेशन। बाद में खान सर ने क्लैरिफाई किया  पुलिस ने मिसबिहेव नहीं किया। मैं डेढ़ महीने से बीमार था। प्रोटेस्ट के स्ट्रेस में तबीयत और बिगड़ गई। बीपीएससी ने नोटिफिकेशन निकाला एक ही पेपर होगा। प्रोटेस्ट सक्सेसफुल रहा।

लेकिन वो कोर्ट एक्शन? वो एविडेंस? वो लीक का प्रूफ? कभी प्रेजेंट नहीं हुआ। एफआईआर फाइल हुई दूसरे टीचर्स के खिलाफ। स्टूडेंट लीडर्स अरेस्ट हुए। लेकिन खान सर? लीगल कॉन्सिक्वेंस — जीरो। पैटर्न नोटिस करिए। 2022 ट्रेनें जलीं, एफआईआर में नाम आया, कुछ नहीं हुआ। 2024  प्रोटेस्ट, हॉस्पिटल, सिम्पैथी मिली, कुछ नहीं हुआ। हर बार  कंट्रोवर्सी, फिर सिम्पैथी, फिर बिजनेस ऐज़ यूज़ुअल।

कॉइनसिडेंस है? या एक पैटर्न है? और फिर आया जून 2025। जब पोस्टर्स के लिए सच में गोलियां चलीं। 2 जून, 2025। मुसल्लहपुर हाट। अब जियोग्राफी समझिए। एक ही एरिया में  दो कोचिंग एम्पायर्स। लगभग सामने-सामने। खान ग्लोबल स्टडीज़  फैसल खान का। और ज्ञान बिंदु जीएस अकादमी  रौशन आनंद का। दोनों सेम स्टूडेंट्स के लिए कंपीट करते हैं। सेम एग्जाम्स। सेम मार्केट। सेम गलियां।

बिहार पुलिस कॉन्स्टेबल एग्जाम के रिजल्ट्स आए। 19,383 पोस्ट्स। खान सर ने पोस्टर लगाया “हमारे 12,000 स्टूडेंट्स सेलेक्टेड।” ज्ञान बिंदु ने क्लेम किया  “हमारे 10,000 स्टूडेंट्स सेलेक्टेड।” अब कैलकुलेट करिए… 12,000 + 10,000 बराबर 22,000। टोटल पोस्ट्स थीं सिर्फ 19,383। मतलब  दोनों का क्लेम एक साथ सच नहीं हो सकता। पोस्टर लगा  एलेज्डली ज्ञान बिंदु के साइनबोर्ड के ऊपर…. डिलिब्रेटली। रात को पोस्टर फाड़ा गया….साइनबोर्ड तोड़े गए….पत्थरबाजी सिक्योरिटी गार्ड्स पर हमला। और फिर  फायरिंग।

सीसीटीवी फुटेज निकला। उसमें दिखा  एक सिक्योरिटी गार्ड के हाथ में हथियार है। गोली चली। खान सर ने पहले कहा  हमारे ऊपर अटैक हुआ, फायरिंग हुई। फिर डिनाय किया नहीं, फायरिंग नहीं हुई। पुलिस ने इन्वेस्टिगेट किया। पहली एफआईआर में फायरिंग का जिक्र था ही नहीं। बाद में जब सीसीटीवी वीडियो सामने आया  तब पता चला कि फायरिंग खान सर के अपने सिक्योरिटी गार्ड्स ने की थी। दोनों गार्ड्स  अरेस्ट। रौशन आनंद ज्ञान बिंदु का ओनर अरेस्ट। 12 दिन जेल।

-खान सर के खिलाफ अलग एफआईआर। कोर्ट ने इंटरिम प्रोटेक्शन दिया  20 जून की हियरिंग तक अरेस्ट नहीं होगा। और फिर एक और ट्विस्ट। रौशन आनंद के भाई प्रिंस यादव…. जिन्हें पहली एफआईआर में नाम किया गया था नेपाल में सस्पिशस सर्कमस्टांसेज़ में उनकी मौत हो गई। रौशन आनंद का एलीगेशन ये कॉन्सपिरेसी है। फैसल खान ने प्लान किया। आज दोनों कोचिंग सेंटर्स बंद हैं। हजारों स्टूडेंट्स…. जिनके बीपीएससी ऑडिटर का एग्जाम 5 जुलाई को है, 72वां कंबाइंड एग्जाम 26 जुलाई को है बिना पढ़ाई के बैठे हैं।

आर्म्ड गार्ड्स….फायरिंग…..जेल….सस्पिशस डेथ….कोर्ट्स। ये कोई गैंगस्टर की कहानी नहीं है। ये दो टीचर्स की कहानी है। दो कोचिंग सेंटर्स की। एक एजुकेशन हब की। तो अब सीधी बात। खान सर की कहानी के दो साइड्स हैं। दोनों रियल हैं। दोनों सिमल्टेनियसली सच हैं। साइड एक फैसल खान ने एजुकेशन को एक्सेसिबल बनाया। 5,000 रुपये में कोचिंग दी जहां दूसरे 50,000 लेते हैं। हिंदी मीडियम स्टूडेंट्स को  जिन्हें सिस्टम ने इग्नोर किया  उन्हें एक प्लेटफॉर्म दिया। हॉस्पिटल खोला जहां ब्लड टेस्ट 7 रुपये में होता है। ईसीजी 25 रुपये। एक्स-रे 35 रुपये। 107 करोड़ ठुकराए  रिपोर्टेडली ताकि फीस न बढ़े।

दूसरी साइड उनके नाम पर ट्रेनें जलीं। उनके वीडियो पर स्टूडेंट्स ने वायलेंस की। आर्म्ड गार्ड्स रखते हैं कोचिंग सेंटर में। उनके गार्ड्स ने फायरिंग की। एफआईआर है। अरेस्ट वारंट है। राइवल के भाई की मौत का एलीगेशन है। और हर कंट्रोवर्सी के बाद —कोई लीगल कॉन्सिक्वेंस नहीं। दोनों साइड्स रियल हैं। लेकिन इससे बड़ा एक स्ट्रक्चरल सवाल है। पटना की कोचिंग इंडस्ट्री का एनुअल रेवेन्यू है  450 से 500 करोड़ रुपये। मुसल्लहपुर हाट अकेला  एक छोटा सा एरिया  एक मिनी-इकोनॉमी है। कोचिंग फीस….हॉस्टल्स…..मेस….बुक्स….ट्रांसपोर्ट….प्रिंटिंग…. स्टेशनरी। सब कुछ एजुकेशन पर चलता है।

बिहार में इंडस्ट्रियलाइजेशन कम है। प्राइवेट सेक्टर में जॉब्स कम हैं। गवर्नमेंट यूनिवर्सिटीज कमजोर हैं। तो क्या बचता है? सरकारी नौकरी का सपना। और उस सपने को बेचने वाले कोचिंग सेंटर्स। जब इतना पैसा इन्वॉल्व हो  500 करोड़ का मार्केट तो टीचर सिर्फ टीचर नहीं रहता। वो एक इंडस्ट्री बन जाता है। और इंडस्ट्री में कॉम्पिटिशन होती है। कॉम्पिटिशन में टेरिटरी होती है। टेरिटरी में  पोस्टर्स लगते हैं। पोस्टर पर झगड़ा होता है। झगड़े में पत्थर चलते हैं। और पत्थर के बाद गोलियां।

खान सर की कहानी चाहे उन्हें हीरो मानो या मोगुल….. असल में बिहार के एक बहुत बड़े सिस्टमिक प्रॉब्लम की कहानी है। जब सरकारी नौकरी की भूख इतनी ज्यादा हो  जब गवर्नमेंट अपनी यूनिवर्सिटीज फिक्स न करे जब प्राइवेट सेक्टर जॉब्स न दे  तो कोचिंग सेंटर्स सरकार बन जाते हैं। और टीचर  नेता। और जब टीचर्स नेता बन जाएं  तो एजुकेशन खत्म होती है और बिजनेस शुरू होता है।

ये कहानी अभी खत्म नहीं हुई है। 20 जून को पटना कोर्ट में अगली सुनवाई है। रौशन आनंद बेल पर हैं। खान सर एंटिसिपेटरी बेल पर हैं। प्रिंस यादव की मौत की जांच चल रही है। आपको क्या लगता है? जब एक टीचर इतना पावरफुल हो जाए तो वो एजुकेशन के लिए अच्छा है या खतरनाक?

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