लखनऊ : राजधानी के सरकारी अस्पताल का यह हाल, तो प्रदेश भर के हालात कैसे होंगे?

लखनऊ। राजधानी लखनऊ के सिविल अस्पताल में दवाओं का भारी संकट व्याप्त है। इमरजेंसी वार्ड सहित विभिन्न विभागों में जरूरी दवाएं नहीं मिल रही हैं, जिससे मरीजों को बाहर से महंगे दामों पर दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। गर्मी के इस प्रचंड मौसम में मरीज बेहाल हो रहे हैं, लेकिन अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई राहत नहीं मिल रही।

इमरजेंसी में भी दवाओं की कमी

सिविल अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में लूज मोशन, पेट दर्द, पाचन संबंधी और अन्य सामान्य बीमारियों की दवाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। मरीजों और उनके परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर सीधे जवाब दे रहे हैं — “बाहर से खरीदिए”।

करोड़ों के बजट के बावजूद संकट

स्वास्थ्य विभाग को करोड़ों रुपये का बजट आवंटित होने के बावजूद दवा खरीद और आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। इस स्थिति ने अस्पताल की खरीद प्रक्रिया और दवा प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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सीएम आवास के पास बदहाल तस्वीर

सिविल अस्पताल मुख्यमंत्री आवास से महज कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। राजधानी के प्रमुख सरकारी अस्पताल का यह हाल देखकर सवाल उठ रहा है कि प्रदेश के अन्य जिलों के सरकारी अस्पतालों की स्थिति क्या होगी?

डिप्टी सीएम पर सवाल

इस संकट ने उपमुख्यमंत्री डॉ. बृजेश पाठक के स्वास्थ्य विभाग पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्षी दलों और आमजन दोनों ही तरफ से स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली को लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है।

मरीजों का कहना है कि बेसिक दवाएं तक न मिलना स्वास्थ्य व्यवस्था की पूरी विफलता है। गर्मी में डिहाइड्रेशन और पेट संबंधी बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन अस्पताल इनका प्रबंधन करने में नाकाम नजर आ रहा है।

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