UP: बलिया में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के बैनर तले बड़ी संख्या में शिक्षकों ने 27 जुलाई 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता लागू किए जाने का विरोध किया। जिले के विभिन्न विकास खंडों से आए शिक्षक और शिक्षिकाएं एकजुट होकर धरना-प्रदर्शन में शामिल हुए और अपनी नाराजगी जाहिर की।
पुराने नियमों के आधार पर हुई थी नियुक्तियां
धरना स्थल पर आयोजित सभा में जिला संयोजक राजेश कुमार सिंह ने कहा कि वर्ष 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों की भर्ती उस समय लागू नियमों के अनुसार हुई थी। ऐसे में बाद में बनाए गए प्रावधानों को पूर्व प्रभाव से लागू करना न केवल अनुचित है, बल्कि यह प्राकृतिक न्याय और संवैधानिक मूल्यों के भी खिलाफ है।
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सेवा सुरक्षा और सम्मान की उठी मांग
शिक्षक नेताओं ने कहा कि वर्षों से शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में योगदान दे रहे शिक्षकों के अधिकारों और सेवा सुरक्षा की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है। संगठन किसी अतिरिक्त लाभ की मांग नहीं कर रहा, बल्कि केवल पूर्व नियुक्त शिक्षकों के वैधानिक और संवैधानिक अधिकारों को सुरक्षित रखने की बात कर रहा है।
प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
प्रदर्शन के बाद शिक्षकों ने जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग की गई। शिक्षकों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
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एकजुटता के साथ संघर्ष जारी रखने का संकल्प
सभा में जिले के विभिन्न ब्लॉकों से पहुंचे शिक्षक नेताओं और शिक्षकों ने अपने विचार रखे और शिक्षक हितों की रक्षा के लिए एकजुट रहने का संकल्प लिया। इस दौरान राजेश सिंह, ज्ञान प्रकाश उपाध्याय, अकिलुर्रहमान खान, संजीव कुमार सिंह, ओंकार सिंह, कर्ण प्रताप सिंह, अमित यादव, मुकेश सिंह, समीर कुमार पांडेय, संजय पांडेय, हरीशंकर यादव, रूपेश कुमार, श्यामनारायण, प्रीतिंदर सिंह और राम प्रताप यादव सहित कई शिक्षक मौजूद रहे।
















































