‘गांवों का विकास सरकार का लक्ष्य, वाराणसी में ‘वीबी-जी राम जी अधिनियम’ सम्मेलन मे बोले केशव मौर्य

वाराणसी: ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार और उत्तर प्रदेश ग्राम्य विकास विभाग के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार को सिगरा स्थित रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में ‘विकसित भारत जी राम जी अधिनियम, 2025’ के तहत प्रथम पंच सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार और झारखंड के पंचायत प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

मुख्य अतिथि उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि नई व्यवस्था का उद्देश्य गांवों का समग्र विकास करना है। उन्होंने कहा कि पुरानी मनरेगा योजना में केवल धन खर्च करने पर जोर था, जबकि नई व्यवस्था में विकसित पंचायत, बुनियादी सुविधाओं और दीर्घकालिक ग्रामीण विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में 25 करोड़ से अधिक लोग गरीबी रेखा से बाहर आए हैं और सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है।

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उप मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार गांवों में रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने महिला उद्यमी क्रेडिट कार्ड योजना, स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा देने और गांवों से पलायन रोकने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार “न खाऊंगा, न खाने दूंगा” के सिद्धांत पर कार्य कर रही है और विकसित उत्तर प्रदेश के बिना विकसित भारत का सपना पूरा नहीं हो सकता।

केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पासवान ने कहा कि देश की लगभग 70 प्रतिशत आबादी गांवों में रहती है, इसलिए ग्रामीण विकास सबसे बड़ी प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि नए अधिनियम के माध्यम से अगले 25 वर्षों के ग्रामीण विकास का रोडमैप तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि अब बार-बार एक ही कार्य कराने के बजाय स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण और मजबूत पंचायतों के विकास पर ध्यान दिया जाएगा।

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आयुक्त ग्राम्य विकास जी.एस. प्रियदर्शी ने बताया कि एक जुलाई 2026 से लागू हुए अधिनियम के तहत यह पहला पंच सम्मेलन आयोजित किया गया है। उन्होंने कहा कि रोजगार गारंटी की अवधि 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है और पंचायतों की भूमिका को पहले से अधिक मजबूत बनाया गया है।