लखनऊ : भीषण गर्मी और नौतपा के बीच लखनऊ विश्वविद्यालय की परीक्षाओं को लेकर छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों में तेजी से नाराजगी बढ़ रही है। रविवार को लखनऊ, सीतापुर और हरदोई के कई परीक्षा केंद्रों पर गर्मी से छात्र-छात्राएं बेहोश हो गए। कई केंद्रों पर पंखे, कूलर और ठंडे पानी की भी समुचित व्यवस्था नहीं थी।
गर्मी में परीक्षा, छात्रों के बेहोश होने की खबरें
रविवार को जब तापमान 44-45 डिग्री के आसपास पहुंच गया, तब परीक्षा देते समय कई छात्र बेहोश हो गए। अभिभावकों और छात्र संगठनों का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने गर्मी को लेकर कोई ठोस तैयारी नहीं की। पंखे तक पर्याप्त संख्या में नहीं लगाए गए और ठंडे पानी की व्यवस्था भी ज्यादातर केंद्रों पर नाकाफी रही।
“परीक्षा जरूरी या छात्रों की जान?”
शिक्षकों और छात्र संगठनों ने सवाल उठाया है कि जब पूरे प्रदेश में नौतपा चल रहा है और लू का प्रकोप है, तो ऐसे हालात में परीक्षाएं आयोजित करना विद्यार्थियों के जीवन के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने कहा कि प्रशासन अपनी हठधर्मिता छोड़कर छात्रों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता दे।
विश्वविद्यालय प्रशासन पर हठधर्मिता का आरोप
छात्रों का कहना है कि लगातार शिकायतें और अपील करने के बावजूद लखनऊ विश्वविद्यालय प्रशासन जून माह के अंदर परीक्षाएं समाप्त करने पर अड़ा हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि गर्मी की उपेक्षा कर परीक्षाएं कराना छात्रों के स्वास्थ्य के साथ समझौता है।
छात्रों-शिक्षकों की मांग
छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों ने मांग की है कि वर्तमान मौसम परिस्थितियों को देखते हुए सभी परीक्षाओं को जुलाई महीने में स्थगित कर दिया जाए। इससे छात्रों को बेहतर और सुरक्षित माहौल में परीक्षा देने का मौका मिल सकेगा और किसी अनहोनी को रोका जा सकेगा।
बढ़ता आक्रोश
लखनऊ विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों और संबद्ध कॉलेजों के छात्र इस मुद्दे पर एकजुट हो रहे हैं। कई छात्र संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर परीक्षाओं में देरी नहीं की गई तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
प्रशासन की ओर से अभी तक इस गंभीर मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। अभिभावक लगातार अपील कर रहे हैं कि विश्वविद्यालय अपनी जिद छोड़े और छात्रों के स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दे।
भीषण गर्मी के इस दौर में लखनऊ विश्वविद्यालय की परीक्षाएं छात्रों के लिए जानलेवा साबित हो रही हैं। अब देखना होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों की मांग पर कितनी जल्दी संज्ञान लेता है।

















































