मंदिर, मैट और भंडारे…अमेठी में विपक्ष की ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ की सियासत!

अमेठी: 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल धीरे-धीरे गर्माने लगा है। जिले में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की ओर से धार्मिक स्थलों से जुड़ी गतिविधियों के चलते ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ की राजनीति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक गलियारों में इन कदमों को चुनावी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

कांग्रेस और सपा के धार्मिक कार्यक्रम चर्चा में

कांग्रेस सांसद किशोरी लाल शर्मा ने अपनी सांसद निधि से जिले के कई सिद्धपीठों और देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मैट उपलब्ध कराए हैं। वहीं, समाजवादी पार्टी के तिलोई विधानसभा क्षेत्र से पूर्व प्रत्याशी जैनुल हसन ने बड़े मंगल के अवसर पर विशाल भंडारे का आयोजन कराया था। इन दोनों पहल को लेकर राजनीतिक विश्लेषकों के बीच अलग-अलग तरह की चर्चाएं हो रही हैं।

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भाजपा ने साधा विपक्ष पर निशाना

इन घटनाक्रमों के बीच भाजपा ने कांग्रेस और सपा पर चुनावी लाभ के लिए धार्मिक आस्था का सहारा लेने का आरोप लगाया है। भाजपा के वरिष्ठ नेता गोविंद सिंह चौहान ने कहा कि जैसे-जैसे 2027 का चुनाव करीब आ रहा है, विपक्षी दलों को मंदिर और धार्मिक आयोजन याद आने लगे हैं। उनके मुताबिक, मंदिरों में सुविधाएं उपलब्ध कराना और भंडारे आयोजित करना जनता को प्रभावित करने की कोशिश है।

गोविंद सिंह चौहान का बयान

गोविंद सिंह चौहान ने कहा कि जिन दलों का पहले राम मंदिर और कारसेवकों के मुद्दे पर अलग रुख रहा, वही अब धार्मिक आयोजनों के जरिए अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश की जनता इस बदलाव को समझ रही है और केवल प्रतीकात्मक धार्मिक कार्यक्रमों से चुनावी सफलता हासिल नहीं की जा सकती।

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विपक्ष की चुप्पी, राजनीतिक विश्लेषकों की नजर

फिलहाल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की ओर से भाजपा के आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दे लगातार चुनावी राजनीति के केंद्र में बने हुए हैं। ऐसे में सभी प्रमुख दल मतदाताओं तक पहुंच बनाने के लिए अलग-अलग रणनीतियों पर काम कर रहे हैं।

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