मथुरा: विदेशी फंडिंग पर नियंत्रण को लेकर केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित एफसीआरए (Foreign Contribution Regulation Act) संशोधन बिल को लेकर संत समाज ने समर्थन जताया है। संतों का कहना है कि विदेशी स्रोतों से आने वाले धन की निगरानी और उस पर नियंत्रण मजबूत होने से देश में धर्मांतरण सहित कथित तौर पर चलाए जा रहे विभिन्न षड्यंत्रों पर अंकुश लगाया जा सकेगा। वहीं, इस प्रस्तावित कानून को लेकर विदेशों, विशेषकर अमेरिका में भी विरोध की चर्चाएं सामने आने का दावा किया जा रहा है।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि-ईदगाह प्रकरण के याचिकाकर्ता दिनेश फलाहारी महाराज ने कहा कि विदेशी फंडिंग के जरिए भारत में कई प्रकार की गतिविधियों को संचालित किए जाने की शिकायतें लंबे समय से सामने आती रही हैं। उनके अनुसार एफसीआरए में प्रस्तावित बदलाव से विदेशी धन के इस्तेमाल पर निगरानी और कड़ी होगी तथा इसका दुरुपयोग करने वालों पर कार्रवाई का रास्ता मजबूत होगा।
दिनेश फलाहारी महाराज ने आरोप लगाते हुए कहा कि विदेशी फंडिंग के सहारे कुछ कथित माफिया देश में धर्मांतरण और अन्य षड्यंत्रकारी गतिविधियों को बढ़ावा देने में लगे हैं। उन्होंने कहा कि एफसीआरए बिल लागू होने से ऐसे लोगों पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी। उन्होंने लव जिहाद, लैंड जिहाद और धर्मांतरण जैसे मुद्दों का उल्लेख करते हुए कहा कि विदेशी आर्थिक मदद के स्रोतों की जांच और पारदर्शिता बढ़ना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि भारत में आने वाली विदेशी सहायता का इस्तेमाल यदि सामाजिक और जनकल्याणकारी कार्यों के लिए हो रहा है तो उसका स्वागत होना चाहिए, लेकिन यदि किसी संगठन द्वारा विदेशी धन का इस्तेमाल देश में अवैध गतिविधियों अथवा सामाजिक तनाव बढ़ाने के लिए किया जाता है तो उस पर प्रभावी कार्रवाई होनी चाहिए। संत समाज का कहना है कि एफसीआरए व्यवस्था का उद्देश्य विदेशी चंदे और फंडिंग की निगरानी को मजबूत करना है।

















































