Gonda में सकरौरा स्थित पौराणिक अगस्त कुंड के कायाकल्प की पहल ग्राम प्रधान पराग दत्त गुप्ता ने की है। करीब तीन दशक से उपेक्षित पड़े इस धार्मिक स्थल की साफ-सफाई और खुदाई का कार्य कराया जा रहा है। मुख्य मार्ग से अगस्त कुंड तक काली सड़क का निर्माण भी शुरू कराया गया है। विकास कार्य शुरू होने से ग्रामीणों और श्रद्धालुओं में उत्साह है।
जानिए क्या है पूरा मामला?
स्थानीय मान्यता के अनुसार महर्षि अगस्त ने इसी स्थान पर तपस्या की थी। कहा जाता है कि भगवान श्रीराम भी यहां पहुंचे थे और महर्षि अगस्त का आशीर्वाद प्राप्त किया था। इसी कारण अगस्त कुंड क्षेत्र में धार्मिक आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है।ग्रामीणों के अनुसार पहले अगस्त आश्रम और कुंड में धार्मिक गतिविधियां होती थीं। दूर-दराज से श्रद्धालु सरयू में स्नान के बाद यहां दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते थे। समय के साथ सरयू की धारा बदलने और देखरेख के अभाव में यह स्थल उपेक्षित होता चला गया।
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अब ग्राम प्रधान की पहल पर कुंड की खुदाई और सफाई कराई जा रही है। करीब एक माह से चल रही खुदाई के दौरान प्राचीन सीढ़ियां और शिलालेख सामने आए हैं। इससे लोगों में स्थल के इतिहास को लेकर उत्सुकता बढ़ी है। ग्रामीणों ने प्राचीन संरचनाओं की विशेषज्ञों से जांच और संरक्षण की मांग की है।ग्रामीणों का कहना है कि खुदाई के दौरान मिली पुरानी सीढ़ियां और अन्य अवशेष इस स्थल के पुराने स्वरूप की ओर संकेत करते हैं। यदि इनकी विशेषज्ञों से जांच कराकर सुरक्षित रखा जाए तो अगस्त कुंड के इतिहास से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है। लोगों ने प्रशासन से स्थल का निरीक्षण कराने की मांग भी की है। मुख्य मार्ग से कुंड तक सड़क बनने से श्रद्धालुओं को आवागमन में सुविधा मिलने की उम्मीद है। ग्राम प्रधान पराग दत्त गुप्ता ने अगस्त कुंड और अगस्त आश्रम को धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित कराने के लिए जनप्रतिनिधियों से भी संपर्क किया है। उनका प्रयास है कि यहां श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हों। ग्रामीणों ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि लंबे समय बाद पौराणिक स्थल की सुध ली गई है। लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के सहयोग से अगस्त कुंड को क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकेगा।


















































