उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित अवैध घोषित मस्जिद को शनिवार सुबह प्रशासन ने ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई के लिए तड़के करीब 4 बजे भारी पुलिस बल के साथ प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची। सुबह करीब 6 बजे चार बुलडोजरों की मदद से मस्जिद को गिराने की प्रक्रिया शुरू हुई। कार्रवाई के दौरान कलेक्ट्रेट के प्रमुख गेट बंद रहे और बाहरी लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई। मलबे को नगर निगम की गाड़ियों के जरिए हटाया गया।
अदालत के फैसले के बाद हुई कार्रवाई
मस्जिद को लेकर विवाद पिछले करीब डेढ़ साल से चल रहा था। प्रशासन के मुताबिक, सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने 16 जुलाई को विवादित जमीन को सरकारी भूमि मानते हुए मस्जिद को अवैध घोषित किया था और 6.41 करोड़ रुपये से अधिक की क्षतिपूर्ति भी तय की थी। इसके बाद मस्जिद कमेटी ने जिला अदालत में अपील दाखिल की, जिसे 2 सितंबर को जिला जज सतेंद्र कुमार की अदालत ने पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के आधार पर खारिज कर दिया। प्रशासन ने इसी न्यायिक प्रक्रिया के बाद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की।
ओवैसी ने सरकार पर उठाए सवाल
मस्जिद गिराए जाने के बाद AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने यूपी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि सहारनपुर कलेक्ट्रेट में मौजूद मस्जिद को आज सुबह 5 बजे ढहा दिया गया। क्या मुसलमानों के लिए अब मज़हबी आज़ादी का संवैधानिक हक़ भी नहीं बचा है? हमारी इबादतगाहों पर बार-बार कमज़ोर और मनगढ़ंत वजहों के नाम पर बुलडोज़र क्यों चलाया जाता है? मस्जिद कमेटी ने 1911 के दस्तावेज़ अदालत में पेश करके यह साबित करने की कोशिश की कि यह मस्जिद कलेक्ट्रेट से पहले से मौजूद थी। एक सदी से भी ज़्यादा वक़्त से वहाँ लगातार नमाज़ होती रही है। यानी यह कोई आज खड़ी कर दी गई इमारत नहीं है, बल्कि लंबे अरसे से एक इबादतगाह के तौर पर इस्तेमाल होती रही है।
यही वक़्फ़ बाय यूज़र की बुनियाद है, जिसे क़ानून में भी मान्यता मिली है। और Limitation Act का भी यही उसूल है कि हुकूमत किसी ज़मीन पर एक सदी से ज़्यादा पुरानी, खुलेआम और लगातार चली आ रही क़ब्ज़ेदारी को अचानक नज़रअंदाज़ करके एक दिन उठे और कहे कि अब यह ज़मीन हमारी है। जब एक सदी से ज़्यादा अरसे से खुला और लगातार क़ब्ज़ा रहा है, तो रियासत यह कैसे मान सकती है कि क़ब्ज़ा कल से शुरू हुआ था?
हुकूमत की दलील को मान भी लें, तो इतने लंबे अरसे की क़ब्ज़ेदारी के बाद adverse possession का सवाल तो उठेगा ही। मस्जिद पहले थी, कलेक्ट्रेट बाद में आया। कुछ लोगों को शायद मस्जिद दिख जाने पर भी तकलीफ़ होती है। लेकिन यह उनका मसला है, हमारा नहीं। नज़र फेरनी है तो फेर लो। लेकिन अपनी खुन्नस मिटाने के लिए हमारी मस्जिद पर बुलडोज़र नहीं चला सकते। मेरी मज़हबी आज़ादी आपकी रहम-ओ-करम पर मुबनी नहीं है।
इकरा हसन को रोका, नेताओं की भी बढ़ी हलचल
ध्वस्तीकरण की खबर सामने आने के बाद कैराना से सपा सांसद इकरा हसन सहारनपुर के लिए रवाना होने की कोशिश कर रही थीं, लेकिन पुलिस ने उन्हें उनके आवास पर ही रोक दिया। इस दौरान सांसद और पुलिस के बीच तीखी बहस भी हुई। वहीं, कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने शुक्रवार रात मामले को लेकर लाइव आकर प्रतिक्रिया दी। सपा विधायक आशु मलिक और एमएलसी शाहनवाज खान भी कलेक्ट्रेट पहुंचे, लेकिन उन्हें मुख्य गेट पर रोक दिया गया। बाद में नेताओं ने जिलाधिकारी से मुलाकात की।
भारी सुरक्षा के बीच कार्रवाई, अफवाहों पर पुलिस की चेतावनी
मस्जिद ध्वस्तीकरण को देखते हुए कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। सहारनपुर मंडल के डीआईजी अभिषेक सिंह के मुताबिक, अदालत में पहली अपील खारिज होने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई की। त्योहारों को देखते हुए आरएएफ की पांच कंपनियों समेत बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। डीआईजी ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील करते हुए सोशल मीडिया पर अफवाह या फर्जी खबर फैलाने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी।




















































