सहारनपुर : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन को केवल सरकारी उपलब्धियों तक सीमित नहीं रखा. उन्होंने विकास कार्यों का उल्लेख करने के साथ कानून-व्यवस्था, धार्मिक आस्था और विपक्ष पर तीखे राजनीतिक हमले किए.
भाषण की शुरुआत विकास परियोजनाओं और शिक्षा से हुई. मुख्यमंत्री ने दिल्ली-सहारनपुर-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर, प्रस्तावित एयरपोर्ट, मेडिकल कॉलेज, सीवेज परियोजनाओं और वुड कार्विंग उद्योग का उल्लेख कर सरकार के इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल को सामने रखा. उन्होंने कहा कि बेहतर सड़क और कनेक्टिविटी से अर्थव्यवस्था मजबूत होती है और सहारनपुर तेजी से नए विकास की ओर बढ़ रहा है. इसके बाद योगी ने कानून-व्यवस्था को बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाया. उन्होंने कहा कि 2017 से पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश दंगों के लिए जाना जाता था, जबकि अब प्रदेश दंगा मुक्त है. इस संदेश के जरिए भाजपा ने एक बार फिर अपनी सबसे मजबूत राजनीतिक थीम ‘सख्त कानून-व्यवस्था’ को दोहराया.
भाषण का तीसरा और सबसे राजनीतिक हिस्सा धार्मिक आस्था पर केंद्रित रहा. योगी ने मां शाकंभरी देवी कॉरिडोर, अयोध्या, काशी और संत रविदास से जुड़े विकास कार्यों का जिक्र करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार विरासत और विकास दोनों को साथ लेकर चल रही है. वहीं समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उसने भगवान राम, काशी और अन्य धार्मिक स्थलों के विकास का विरोध किया.
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मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर हमला करते हुए कहा कि पहले विकास का पैसा गलत प्राथमिकताओं पर खर्च होता था, जबकि अब वही पैसा सड़क, मेडिकल कॉलेज, एयरपोर्ट और धार्मिक स्थलों के विकास में लगाया जा रहा है. यह संदेश भाजपा के उस राजनीतिक नैरेटिव को मजबूत करता है जिसमें पिछली सरकारों और मौजूदा सरकार के कामकाज की तुलना की जाती है.
सहारनपुर पश्चिमी उत्तर प्रदेश का अहम जिला है, जहां शहरी, ग्रामीण, किसान, व्यापारी और दलित वोटों का बड़ा प्रभाव है. ऐसे में योगी के भाषण में विकास, रोजगार, धार्मिक आस्था, कानून-व्यवस्था और विपक्ष की आलोचना इन सभी मुद्दों को शामिल कर अलग-अलग वर्गों को साधने की कोशिश दिखाई दी.













































