फर्रुखाबाद : जिले की प्रख्यात स्त्री रोग विशेषज्ञ, वरिष्ठ समाजसेवी, भाजपा नेत्री एवं हजारों परिवारों के लिए विश्वास का दूसरा नाम रहीं डॉ. रजनी सरीन का 78 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही पूरे जनपद में शोक की लहर दौड़ गई। चिकित्सा, समाजसेवा और जनकल्याण के क्षेत्र में उनका योगदान इतना व्यापक रहा कि उनके निधन को जिले के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है।
कई दिनों से अस्वस्थ चल रही डॉ. सरीन ने जीवन की अंतिम सांस ली। उनका पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए लोहाई रोड स्थित उनके निजी आवास पर रखा गया, जहां राजनीतिक, सामाजिक, चिकित्सा एवं विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों के साथ-साथ बड़ी संख्या में आम नागरिक श्रद्धांजलि अर्पित करने पहुंचे।
डॉ. रजनी सरीन केवल एक चिकित्सक नहीं थीं, बल्कि मानवता की सच्ची सेवक थीं। फर्रुखाबाद में उन्हें स्नेहपूर्वक “भाभी जी” और “डॉक्टर मैम” के नाम से जाना जाता था। उनका सौम्य व्यवहार, मिलनसार व्यक्तित्व और जरूरतमंदों की सहायता के लिए हमेशा तत्पर रहने की भावना उन्हें समाज के हर वर्ग में सम्मान दिलाती थी।
किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज, लखनऊ से चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ के रूप में पांच दशकों से अधिक समय तक सेवा दी। उनके हाथों हजारों बच्चों ने जन्म लिया और अनगिनत परिवारों को नई खुशियां मिलीं। फर्रुखाबाद की कई पीढ़ियां ऐसी हैं जिनकी जिंदगी की शुरुआत डॉ. सरीन की देखरेख में हुई।
विशेष बात यह रही कि अपने निधन से ठीक एक दिन पहले तक भी वह मरीजों की सेवा में जुटी रहीं। गंभीर अस्वस्थता के बावजूद उन्होंने अपने नियमित निःशुल्क रविवार क्लीनिक में सौ से अधिक मरीजों का उपचार किया। यह उनके सेवा-समर्पण की अंतिम मिसाल बन गया।
समाजसेवा को समर्पित रहा पूरा जीवन
डॉ. सरीन ने वर्ष 1972 से गंगा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं चिकित्सा सेवाएं प्रदान कीं। वर्ष 1980 से उन्होंने विशाल चिकित्सा शिविरों का आयोजन शुरू किया, जिनसे हर वर्ष हजारों जरूरतमंद लाभान्वित होते रहे। प्रत्येक माह के पहले रविवार को वह निःशुल्क परामर्श देती थीं और 1974 से सैनिक परिवारों के लिए भी निःशुल्क चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराती रहीं।
उन्होंने नेत्र चिकित्सा शिविर, मुख कैंसर जांच अभियान, दिव्यांग पुनर्वास सेवाएं, पोलियो सुधार शल्य चिकित्सा शिविर और कृत्रिम अंग प्रत्यारोपण कार्यक्रमों का सफल संचालन किया। कोविड-19 महामारी के दौरान उन्होंने गांव-गांव जाकर जरूरतमंदों को निःशुल्क दवाएं उपलब्ध कराईं।
महिला सशक्तिकरण, परिवार नियोजन और कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए उनका योगदान विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा। महिलाओं और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए उन्होंने जीवनभर संघर्ष किया। उन्होंने महिलाओं, दलितों और वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण के लिए अनेक सामाजिक अभियानों का नेतृत्व किया।
50 लाख से अधिक की राशि दान की
डॉ. सरीन ने अपने जीवनकाल में विभिन्न सामाजिक और मानवीय कार्यों के लिए 50 लाख रुपये से अधिक का योगदान दिया। वर्ष 2018 में उनके द्वारा स्थापित सामुदायिक रसोई आज भी जरूरतमंद मरीजों और गरीब परिवारों को भोजन उपलब्ध करा रही है।
उनकी संवेदनशीलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने अपने अस्पताल में छोड़े गए 23 बच्चों के पालन-पोषण और उनके सुरक्षित गोद लेने की व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके अलावा उन्होंने अपराध रोकथाम, विधिक जागरूकता और लोक अदालतों के माध्यम से विवाद निस्तारण जैसे कार्यों में भी सक्रिय योगदान दिया।
चिकित्सा के साथ साहित्य, कला और शिक्षा में भी पहचान
डॉ. रजनी सरीन बहुमुखी प्रतिभा की धनी थीं। वह चिकित्सक होने के साथ-साथ कवयित्री, लेखिका, कलाकार और शिक्षाविद भी थीं। उन्होंने हिंदी साहित्य में महत्वपूर्ण योगदान दिया और कविता की दो पुस्तकें लिखीं। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में उनके लेख प्रकाशित होते रहे।
उन्होंने अभिव्यंजना तथा रेड क्रॉस सोसायटी में नेतृत्वकारी भूमिका निभाई और शमशाबाद स्थित चंद्रकांता रायजादा इंटर कॉलेज की अध्यक्ष के रूप में भी सेवाएं दीं। उन्हें बागवानी, चित्रकला, लेखन और सामाजिक गतिविधियों में विशेष रुचि थी। उन्होंने देश-विदेश के 25 से अधिक देशों की यात्राएं कीं तथा वर्ष 1999 में एक फिल्म निर्माण से भी जुड़ी रहीं।
परिवार आगे बढ़ाएगा सेवा का मिशन
डॉ. सरीन अपने पीछे एक समृद्ध और प्रतिष्ठित परिवार छोड़ गई हैं। उनकी बड़ी पुत्री डॉ. पायल सरीन नंगिया, पुत्री डॉ. कोयल खन्ना तथा पुत्र डॉ. अंकित सरीन चिकित्सा क्षेत्र में महत्वपूर्ण सेवाएं दे रहे हैं। परिवार ने संकल्प लिया है कि सरिन नर्सिंग होम के माध्यम से डॉ. रजनी सरीन द्वारा शुरू किए गए जनसेवा के कार्यों को आगे भी जारी रखा जाएगा।
जिले ने खोई अपनी बेटी, हजारों ने खोया अपना डॉक्टर
डॉ. रजनी सरीन का निधन केवल एक परिवार की क्षति नहीं है, बल्कि पूरे फर्रुखाबाद की अपूरणीय हानि है। जिले ने अपनी एक प्रतिष्ठित बेटी खो दी, हजारों मरीजों ने अपना भरोसेमंद चिकित्सक खो दिया और समाज ने एक ऐसी समाजसेवी को खो दिया जिसने अपना संपूर्ण जीवन दूसरों की सेवा के लिए समर्पित कर दिया।
उनके निधन पर राजनीतिक, सामाजिक, चिकित्सा और शैक्षणिक जगत से जुड़े लोगों ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।यह संस्करण अखबार के मुख्य पृष्ठ या विशेष श्रद्धांजलि समाचार के रूप में प्रकाशित करने योग्य शैली में तैयार किया गया है।













































