मथुरा: विश्वविख्यात कथावाचक और तीर्थ पुरोहित मृदुलकान्त शास्त्री ने वृंदावन में बिजली, पेयजल, सफाई, यातायात और अन्य बुनियादी सुविधाओं की स्थिति को लेकर शासन, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से जवाब मांगा है। सोशल मीडिया पर जारी अपने संदेश में उन्होंने कहा कि वर्षों से स्थानीय नागरिक इन्हीं समस्याओं से जूझ रहे हैं, लेकिन स्थायी समाधान आज तक नहीं हो सका है। उनका कहना है कि आम लोगों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार और प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर उठाए प्रश्न
मृदुलकान्त शास्त्री ने कहा कि वृंदावन के नागरिकों को नियमित बिजली, स्वच्छ पेयजल, साफ-सुथरा वातावरण और बेहतर यातायात व्यवस्था जैसी आवश्यक सुविधाएं मिलनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या क्षेत्र के जनप्रतिनिधि केवल चुनाव के समय जनता के बीच पहुंचते हैं या फिर उनकी समस्याओं के समाधान के लिए भी सक्रिय रहते हैं। उन्होंने कहा कि जनता की आवाज सुनना और उनकी परेशानियों का निराकरण कराना लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
धार्मिक भावनाओं के साथ विकास भी जरूरी
अपने संदेश में शास्त्री ने कहा कि राष्ट्रहित और धार्मिक आस्था का सम्मान हर नागरिक करता है, लेकिन इनके नाम पर लोगों की दैनिक समस्याओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि बिजली, पानी, सड़क, सफाई और जाम जैसी मूलभूत सुविधाओं की मांग करना किसी भी नागरिक का अधिकार है और इसे किसी राजनीतिक या वैचारिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने समाज से भी वास्तविक जनसमस्याओं पर खुलकर चर्चा करने की अपील की।
प्रशासन से समयबद्ध समाधान की मांग
उन्होंने सांसद, विधायक, मेयर, पार्षद और प्रशासनिक अधिकारियों से पूछा कि आखिर हर बार बारिश के बाद बिजली व्यवस्था सामान्य होने का इंतजार क्यों किया जाता है। उनका कहना था कि समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए पहले से प्रभावी योजना और समयबद्ध कार्रवाई जरूरी है। यदि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो आम लोगों का शासन-प्रशासन पर भरोसा प्रभावित हो सकता है।
जनहित में उठाए गए सवाल, राजनीति से नहीं जुड़ा उद्देश्य
मृदुलकान्त शास्त्री ने अपने संदेश के अंत में स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल को निशाना बनाने के लिए नहीं है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य केवल वृंदावन के नागरिकों की वास्तविक समस्याओं को जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि उनके विचारों से सहमति या असहमति सभी का अधिकार है, लेकिन जनहित से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से विचार और जवाबदेही सुनिश्चित होना भी उतना ही आवश्यक है।












































