बाराबंकी : जनपद बाराबंकी की तहसील फतेहपुर के ग्रामीण क्षेत्र से होकर गुजरने वाली शारदा सहायक नहर की शाखा (छोटी नहर) पिछले करीब तीन से चार माह से सूखी पड़ी है. धान की रोपाई के सबसे महत्वपूर्ण समय में भी नहर में पानी नहीं पहुंचने से किसानों के सामने सिंचाई का संकट खड़ा हो गया है. वर्षों से नहर के पानी पर निर्भर किसान अब डीजल इंजन से खेतों की सिंचाई करने को मजबूर हैं. इससे खेती की लागत बढ़ गई है और किसान धान की फसल को लेकर चिंता में हैं. किसानों का कहना है कि समय रहते नहर में पानी नहीं छोड़ा गया तो खेती का खर्च और बढ़ेगा तथा फसल की बढ़वार के साथ उत्पादन पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है. इससे किसानों की आमदनी प्रभावित होने की आशंका भी बढ़ती जा रही है.
धान की रोपाई के बीच गहराया सिंचाई संकट
क्षेत्र में इन दिनों धान की रोपाई का कार्य तेजी से चल रहा है। धान ऐसी फसल है, जिसे रोपाई के बाद समय-समय पर पर्याप्त पानी की आवश्यकता होती है. लेकिन शारदा सहायक नहर की शाखा में पानी नहीं होने से किसानों को खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए निजी संसाधनों पर निर्भर होना पड़ रहा है. कई किसानों का कहना है कि यदि समय पर पर्याप्त सिंचाई नहीं हुई तो फसल की बढ़वार प्रभावित हो सकती है और उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है. इससे पूरे कृषि सीजन की मेहनत पर भी पानी फिरने की आशंका बनी हुई है.
सैकड़ों गांवों की खेती पर असर
शारदा सहायक नहर की यह शाखा देवखरिया, बन्नी, सलेमाबाद, दूघरा, पट्टी, रसूलपनाह, गढ़ा, पकरियापुर, फिरोजपुर, खलीनगर, बिलौली समेत क्षेत्र के अनेक गांवों की कृषि का प्रमुख आधार रही है. स्थानीय किसानों के अनुसार इस नहर के माध्यम से लंबे समय से बड़ी संख्या में खेतों की सिंचाई होती रही है। इस बार नहर सूखी होने से छोटे, सीमांत और बड़े सभी किसान प्रभावित हुए हैं। खेतों तक समय पर पानी नहीं पहुंचने से किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है.
डीजल इंजन बना किसानों का सहारा
नहर में पानी नहीं आने के कारण किसान डीजल इंजन और ट्यूबवेल से खेतों तक पानी पहुंचा रहे हैं. किसानों का कहना है कि एक बीघा खेत की एक बार सिंचाई करने में लगभग 200 से 250 रुपये का डीजल खर्च हो जाता है. धान की फसल में कई बार सिंचाई करनी पड़ती है, इसलिए पूरे सीजन में केवल डीजल पर ही हजारों रुपये अतिरिक्त खर्च होने की आशंका है. पहले जहां नहर का पानी मिलने से यह खर्च बच जाता था, वहीं अब डीजल इंजन ही किसानों का एकमात्र सहारा बन गया है. इससे खेती पहले की तुलना में कहीं अधिक महंगी होती जा रही है.
बढ़ती लागत ने बढ़ाई चिंता
किसानों का कहना है कि पहले ही खाद, बीज, मजदूरी और अन्य कृषि सामग्री के दाम बढ़ चुके हैं. अब सिंचाई पर होने वाला अतिरिक्त खर्च खेती को और महंगा बना रहा है. जिन किसानों के पास दो, तीन या पांच एकड़ तक खेती है, उनके लिए बार-बार डीजल खरीदकर सिंचाई करना आसान नहीं रह गया है. उनका कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो फसल तैयार होने के बाद भी लागत निकालना चुनौती बन सकता है. ऐसे में खेती से होने वाली बचत लगातार कम होती जा रही है.
स्थानीय किसान शिवबरन का कहना है कि वर्षों से नहर के पानी से आसानी से सिंचाई होती थी, लेकिन इस बार नहर सूखी होने के कारण डीजल इंजन चलाना मजबूरी बन गया है. किसान राजेंद्र का कहना है कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है और डीजल का खर्च किसानों की कमर तोड़ रहा है. लवकुश का कहना है कि छोटे किसानों के लिए हर बार डीजल खरीदना बेहद मुश्किल हो गया है. वहीं राममिलन, रामचंद्र और रामनरेश का कहना है कि यदि जल्द नहर में पानी नहीं आया तो धान की फसल की सिंचाई प्रभावित होगी और आर्थिक बोझ और बढ़ जाएगा, किसानों ने कहा कि समय पर पानी मिलना उनकी सबसे बड़ी जरूरत है.
समय पर पानी नहीं मिला तो बढ़ सकती हैं मुश्किलें
किसानों का कहना है कि धान की खेती में शुरुआती दिनों की सिंचाई सबसे महत्वपूर्ण होती है. यदि इस समय पर्याप्त पानी नहीं मिला तो फसल की गुणवत्ता और उत्पादन पर असर पड़ सकता है. यही वजह है कि किसान मजबूरी में अतिरिक्त खर्च उठाकर भी इंजन से सिंचाई कर रहे हैं. उनका कहना है कि खेती उनकी आजीविका का मुख्य साधन है और सिंचाई की समस्या लंबे समय तक बनी रही तो इसका असर पूरे कृषि सीजन पर पड़ सकता है। इससे भविष्य की खेती की योजना भी प्रभावित हो सकती है.
किसानों की मांग
किसानों ने मांग की है कि शारदा सहायक नहर की शाखा में जल्द से जल्द पानी छोड़ा जाए, ताकि धान की फसल को समय पर सिंचाई मिल सके. उनका कहना है कि नहर में पानी आने से खेती की लागत कम होगी, डीजल पर निर्भरता घटेगी और क्षेत्र के किसानों को बड़ी राहत मिलेगी. किसानों का कहना है कि समय पर सिंचाई मिलने से फसल की पैदावार बेहतर होगी और आर्थिक नुकसान से भी काफी हद तक बचा जा सकेगा.
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