मथुरा : मथुरा – वृंदावन नगर निगम क्षेत्र में विकास के कई कार्य महीनों से अधूरे पड़े हैं. इससे स्थानीय लोगों और तीर्थ यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. जनता में निगम की कार्यशैली को लेकर गहरा आक्रोश है. शहर के मुख्य मार्गों पर स्मार्ट सिटी योजना के तहत सड़क खोदने का काम शुरू हुआ था. लेकिन कई जगह पाइप लाइन और केबल डालने के बाद सड़कों की मरम्मत नहीं की गई. कृष्णा नगर, गोविंद नगर, डैंपियर नगर और चौबिया पाड़ा में बड़े-बड़े गड्ढे हादसों को न्योता दे रहे हैं. बरसात से पहले जल निकासी की कोई तैयारी नहीं दिख रही.
वृंदावन में परिक्रमा मार्ग का सौंदर्यीकरण कार्य पिछले एक साल से धीमी गति से चल रहा है. निर्माण सामग्री सड़क पर बिखरी पड़ी है. इससे श्रद्धालुओं को परिक्रमा करने में परेशानी हो रही है. स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि धूल और जाम के कारण ग्राहक कम आ रहे हैं. उनका व्यापार 50 प्रतिशत तक गिर गया है.
यमुना किनारे कई घाटों की मरम्मत का काम भी अधूरा है. वृंदावन के केशी घाट और मथुरा के विश्राम घाट पर सीढ़ियां टूटी पड़ी हैं. स्वच्छता अभियान के तहत लगाए गए कूड़ेदान भी टूट चुके हैं. जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हैं. नालियों की सफाई न होने से मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है.
नगर निगम ने स्ट्रीट लाइट लगाने का टेंडर दिया था. मगर कई कॉलोनियों में अभी तक खंभे ही नहीं लगे. जहां लगे भी हैं, वहां लाइटें महीनों से बंद पड़ी हैं. रात में लोगों को अंधेरे में निकलना पड़ता है. स्थानीय पार्षद भी निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं. उनका आरोप है कि बजट होने के बाद भी ठेकेदार काम पूरा नहीं कर रहे. शिकायतों के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होती.
नगर आयुक्त का कहना है कि बारिश के कारण काम रुका था. सभी ठेकेदारों को 15 दिन का अल्टीमेटम दिया गया है. काम पूरा न होने पर ब्लैकलिस्ट करने की चेतावनी दी गई है.
जनता की मांग है कि कार्यों की समय सीमा तय हो और लापरवाह अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो. ब्रजवासियों का कहना है कि तीर्थ नगरी की हालत सुधारने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं.
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