Home Government “आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के स्वास्थ्य एवं कल्याण के लिए योग”

“आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के स्वास्थ्य एवं कल्याण के लिए योग”

गोरखपुर, 08 जून 2026। महामहिम कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल की प्रेरणा तथा कुलपति प्रो. पूनम टंडन के कुशल नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 के उपलक्ष्य में महिला अध्ययन केंद्र, दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय एवं बाल विकास विभाग (आईसीडीएस), गोरखपुर के संयुक्त तत्वावधान में गृह विज्ञान विभाग परिसर में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के स्वास्थ्य एवं कल्याण हेतु विशेष योग शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की थीम “Yoga for Healthy Aging” रही, जिसका उद्देश्य बढ़ती आयु में स्वस्थ, सक्रिय एवं संतुलित जीवनशैली को प्रोत्साहित करना था।

इस अवसर पर कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने अपने संदेश में कहा कि “योग भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है, जो व्यक्ति को शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक शांति एवं आध्यात्मिक संतुलन प्रदान करती है। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां समाज में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य संवर्धन की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। उनके स्वास्थ्य एवं कल्याण के लिए योग अत्यंत आवश्यक है, जिससे वे स्वयं स्वस्थ रहकर समाज को भी स्वस्थ जीवन का संदेश दे सकें।”

कार्यक्रम का संचालन महिला अध्ययन केंद्र की निदेशक एवं गृह विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. दिव्या रानी सिंह तथा डॉ. अनुपमा कौशिक की उपस्थिति में संपन्न हुआ। अपने संबोधन में प्रो. दिव्या रानी सिंह ने कहा कि नियमित योगाभ्यास तनाव को कम करने, कार्यक्षमता बढ़ाने तथा जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को अपने दैनिक जीवन में योग को शामिल करने के लिए प्रेरित किया।

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योग प्रशिक्षण का संचालन योग प्रशिक्षक सुश्री नीलम सिंह एवं सुश्री विंध्यवासिनी सिंह द्वारा किया गया। प्रशिक्षण सत्र की शुरुआत सूक्ष्म व्यायाम एवं वार्म-अप अभ्यासों से हुई, जिससे शरीर को योगाभ्यास के लिए तैयार किया गया। इसके पश्चात प्रतिभागियों को ताड़ासन के माध्यम से शरीर की मुद्रा एवं संतुलन सुधारने, वृक्षासन द्वारा एकाग्रता एवं मानसिक स्थिरता बढ़ाने तथा त्रिकोणासन से शरीर की लचक एवं मांसपेशियों को मजबूत बनाने का अभ्यास कराया गया।

महिलाओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए भुजंगासन, वज्रासन, पवनमुक्तासन एवं मकरासन का अभ्यास कराया गया, जिनसे रीढ़ की हड्डी को मजबूती, पाचन तंत्र में सुधार तथा शरीर को आराम मिलता है। इसके अतिरिक्त शशांकासन एवं तितली आसन के माध्यम से मानसिक तनाव कम करने एवं शारीरिक लचीलेपन को बढ़ाने की जानकारी दी गई।

प्राणायाम सत्र में प्रतिभागियों को अनुलोम-विलोम, भ्रामरी प्राणायाम, कपालभाति तथा दीर्घ श्वसन अभ्यास कराया गया। प्रशिक्षकों ने बताया कि ये प्राणायाम श्वसन तंत्र को सुदृढ़ बनाने, तनाव एवं चिंता को कम करने तथा मानसिक शांति प्राप्त करने में अत्यंत लाभकारी हैं। इसके पश्चात ध्यान (मेडिटेशन) के माध्यम से आत्मचिंतन एवं मानसिक एकाग्रता का अभ्यास कराया गया।

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कार्यक्रम में तनुराधा सिंह (सुपरवाइजर), सुनीता शुक्ला (सुपरवाइजर), रंजिता (आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री), प्रेमलता (आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री) तथा रीना सिंह (आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री) सहित बड़ी संख्या में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने सहभागिता की। प्रतिभागियों ने योग के महत्व को समझते हुए नियमित योगाभ्यास करने तथा अपने कार्यक्षेत्र में महिलाओं एवं बच्चों के बीच स्वास्थ्य जागरूकता का संदेश प्रसारित करने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम का समापन “स्वस्थ शरीर, शांत मन, उज्ज्वल जीवन” तथा “योग करें – निरोग रहें” के सामूहिक संदेश के साथ हुआ। यह शिविर आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के शारीरिक, मानसिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुआ।

“योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि स्वस्थ, संतुलित एवं सकारात्मक जीवन जीने की कला है। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां समाज के स्वास्थ्य संवर्धन की महत्वपूर्ण वाहक हैं। उनका शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ रहना समाज और राष्ट्र के स्वस्थ भविष्य की आधारशिला है।” — प्रो. पूनम टंडन, कुलपति


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