कतर के LNG प्लांट पर ईरान का हमला, भारत-चीन समेत कई देशों की बढ़ी टेंशन, 5 साल तक गैस सप्लाई हो सकती प्रभावित

मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष अब और गंभीर रूप लेता दिख रहा है। ईरान (Iran) ने इजरायल (Israel) और अमेरिका (America) के साथ-साथ खाड़ी देशों को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया है। हाल ही में ईरान ने कतर (Qatar) के तेल और गैस प्रतिष्ठानों पर हमला कर पूरे क्षेत्र की ऊर्जा सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

रास लफान रिफाइनरी पर हमला, LNG उत्पादन को बड़ा झटका

बुधवार रात हुए हमले में कतर की प्रमुख रास लफान रिफाइनरी को भारी नुकसान पहुंचा। इस हमले से देश की लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) निर्यात क्षमता का लगभग 17% प्रभावित हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षति की भरपाई और मरम्मत में 3 से 5 साल तक का समय लग सकता है।

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कतर ने ‘फोर्स मेज्योर’ घोषित किया, अरबों डॉलर का नुकसान

कतर एनर्जी के CEO साद शेरिदा अल-काबी के अनुसार, मिसाइल हमलों ने उत्पादन सुविधाओं को गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त कर दिया है। इसके चलते कंपनी को कई दीर्घकालिक अनुबंधों पर ‘फोर्स मेज्योर’ लागू करना पड़ा है। अनुमान है कि इस संकट से कतर को सालाना करीब 20 अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है।

भारत के लिए बढ़ी चिंता, गैस आपूर्ति पर असर तय

भारत के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है क्योंकि वह अपनी कुल LNG जरूरत का लगभग 47% कतर से आयात करता है। 2024 में भारत ने 27.8 मिलियन मीट्रिक टन LNG आयात किया, जिसमें से 11.30 MMT कतर से आया था। आपूर्ति में कमी का सीधा असर देश की ऊर्जा सुरक्षा और औद्योगिक गतिविधियों पर पड़ सकता है।

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वैश्विक असर

इस संकट का असर केवल भारत तक सीमित नहीं है। चीन, दक्षिण कोरिया, इटली और बेल्जियम जैसे देश भी कतर से LNG पर निर्भर हैं। आपूर्ति बाधित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने और ऊर्जा संकट गहराने की आशंका है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दबाव बढ़ सकता है।

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