UP: उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां रोजगार की तलाश में जम्मू-कश्मीर गए एक किशोर के धर्म परिवर्तन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। परिवार ने आरोप लगाया है कि उनके 17 वर्षीय बेटे का जबरन धर्म परिवर्तन कराया गया है, जबकि दूसरी ओर स्थानीय मस्जिद प्रशासन ने दावा किया है कि युवक ने अपनी इच्छा से इस्लाम स्वीकार किया।
रोजगार के लिए गया था कश्मीर
जानकारी के अनुसार, बिजनौर के रावली रोड क्षेत्र के एक गांव निवासी किशोर कुछ समय पहले काम की तलाश में जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा इलाके में गया था। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से ताल्लुक रखने वाला यह किशोर वहां एक हेयर कटिंग सैलून में काम कर रहा था।
वीडियो कॉल से परिवार में मचा हड़कंप
परिजनों के मुताबिक, अचानक एक अज्ञात नंबर से उन्हें कॉल और वीडियो संदेश प्राप्त हुए। वीडियो में किशोर को नए नाम के साथ इस्लाम धर्म अपनाते हुए दिखाया गया। परिवार का कहना है कि कॉल करने वाले व्यक्ति ने कहा कि अब उनका बेटा इस्लाम स्वीकार कर चुका है और उसे भूल जाना चाहिए। इस घटना के बाद परिवार सदमे में आ गया और गांव में भी चर्चा तेज हो गई।
नाबालिग होने का दावा
किशोर के चाचा ने बताया कि लड़के की उम्र अभी 18 वर्ष से कम है और इसके प्रमाण के तौर पर परिवार के पास उसकी हाईस्कूल की मार्कशीट मौजूद है। परिवार का आरोप है कि किशोर को बहला-फुसलाकर तथा मानसिक दबाव डालकर धर्म परिवर्तन कराया गया।
हिंदू संगठनों ने उठाई कार्रवाई की मांग
मामले की जानकारी मिलते ही कई हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे। संगठनों ने इसे नाबालिग के जबरन धर्म परिवर्तन का मामला बताते हुए प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की है। संगठनों ने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से किशोर की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने तथा पूरे मामले की गहन जांच कराने की अपील की है। घटना के बाद क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल बताया जा रहा है।
मस्जिद प्रशासन ने जारी किया बयान
दूसरी ओर, कुपवाड़ा स्थित ‘मरकजी जामिया मस्जिद, ग्लासडाजी मनीगाह’ की ओर से जारी एक घोषणा पत्र भी सामने आया है। इसमें कहा गया है कि 15 मई 2026 को युवक ने स्वेच्छा से इस्लाम धर्म स्वीकार किया और उसका नया नाम ‘मोहम्मद हमजा’ रखा गया। घोषणा पत्र के अनुसार, धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया मौलवी कय्यूम आहंगर की मौजूदगी में पूरी हुई। मस्जिद प्रशासन का कहना है कि युवक से यह पूछा गया था कि उस पर किसी प्रकार का दबाव या लालच तो नहीं डाला गया, जिस पर उसने कथित रूप से इनकार किया।
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कानूनी जांच पर टिकी निगाहें
फिलहाल पूरा मामला जांच और कानूनी प्रक्रिया के दायरे में आता दिख रहा है। यदि किशोर की उम्र वास्तव में 18 वर्ष से कम पाई जाती है, तो मामला कानूनी रूप से और गंभीर हो सकता है। प्रशासनिक स्तर पर पूरे घटनाक्रम की जांच की संभावना जताई जा रही है।













































