रायबरेली : कलेक्ट्रेट सभागार में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब जनता दर्शन में फरियाद लेकर पहुंचे एक बुजुर्ग की बेबसी देख जिलाधिकारी का दिल पसीज गया. बरसों से सरकारी दफ्तरों की धूल फांक रहे एक लाचार बुजुर्ग को जब डीएम सरनीत कौर ब्रोका के सख्त तेवर और एसडीएम सदर की ‘सुपरमैन’ वाली संवेदनशीलता का साथ मिला, तो सालों से अटका काम मिनटों में हो गया.
मामला तहसील सदर के ग्राम छिवलामऊ का है। यहां के रहने वाले बुजुर्ग कंधई लाल पुत्र रज्जुलाल अपनी ही जमीन पर कब्जे के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे थे. दबंगों की नजर और सरकारी लेटलतीफी के बीच फंसे कंधई लाल ने जब अपनी आपबीती जिलाधिकारी सरनीत कौर ब्रोका को सुनाई, तो डीएम साहब का पारा चढ़ गया. प्रकरण की गंभीरता को भांपते हुए डीएम ने तुरंत ऑन-द-स्पॉट एक्शन लिया और एसडीएम सदर गौतम सिंह को तलब कर फाइल पर तत्काल आर-पार की कार्रवाई के निर्देश दे डाले.
जब ‘सिस्टम’ पर भारी पड़ी इंसानियत: एसडीएम ने खुद जेब से भरे पैसे
इस पूरे मामले में असली ट्विस्ट तब आया जब फाइल खंगालने पर पता चला कि कंधई लाल का मुकदमा एसडीएम सदर न्यायालय में ही विचाराधीन था. चिट्ठी बंटवारे की पुष्टि तो हो चुकी थी, लेकिन सरकारी कागजी पचड़ों और स्टाम्प शुल्क के चक्कर में ‘डिक्री’ (अंतिम आदेश) की फाइल दबी पड़ी थी.
बुजुर्ग कंधई लाल की ढलती उम्र और बेबसी देखकर एसडीएम सदर गौतम सिंह ने जो किया, उसने हर किसी का दिल जीत लिया। ‘अधिकारी’ की कुर्सी से उठकर एक ‘मददगार’ की भूमिका निभाते हुए एसडीएम ने मानवीय संवेदनशीलता की मिसाल पेश की और बुजुर्ग की जेब के बजाय खुद अपनी जेब से स्टाम्प शुल्क का भुगतान कर दिया! स्टाम्प ड्यूटी जमा होते ही तत्काल डिक्री जारी की गई और एसडीएम ने अपने हाथों से उसकी कॉपी बुजुर्ग कंधई लाल को सौंपी.
सिर्फ कागजी कार्रवाई ही नहीं, बल्कि जमीन पर असली हक दिलाने के लिए भी प्रशासन ने पूरी फील्डिंग सजा दी है। डीएम के निर्देश पर एसडीएम ने तुरंत तहसीलदार को फोर्स के साथ मौके पर जाकर ‘इजराय’ (आदेश का पालन और कब्जा दिलाने) की कार्रवाई सुनिश्चित करने का अल्टीमेटम दे दिया है। साफ़ संदेश है—अगर किसी ने भी बुजुर्ग की जमीन पर आंख उठाई, तो खैर नहीं.
सालों से नाउम्मीद हो चुके बुजुर्ग कंधई लाल के हाथ में जब अपनी जमीन के कागजात आए, तो उनकी आंखें छलक आईं. उन्होंने हाथ जोड़कर डीएम और ‘मसीहा’ बने एसडीएम सदर का आभार जताते हुए कहा— “साहब! अगर आज आप न होते, तो शायद मैं जीते जी अपनी जमीन कभी न देख पाता.”













































