UP: बांदा तहसील परिसर स्थित महर्षि पैल सभागार में शनिवार को आयोजित जिला स्तरीय संपूर्ण समाधान दिवस जिलाधिकारी की अनुपस्थिति के कारण चर्चा का विषय बन गया। दूर-दराज के गांवों से अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद लेकर पहुंचे लोगों को निराशा हाथ लगी। अधिकारियों ने शिकायतें तो सुनीं, लेकिन डीएम के कार्यक्रम में शामिल न होने को लेकर फरियादियों के बीच असंतोष देखने को मिला।
सार्वजनिक शौचालय पर ताले का आरोप, राशन कार्ड न बनने की शिकायत
समाधान दिवस में पडोहरा गांव के अरुण सिंह चौहान ने आरोप लगाया कि ग्राम प्रधान ने सार्वजनिक शौचालय पर ताला लगा रखा है। उनका कहना था कि आईजीआरएस पोर्टल और जिला प्रशासन से कई बार शिकायत करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिससे ग्रामीणों को खुले में शौच के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। वहीं अमलोर गांव की सुमन ने नया राशन कार्ड जारी न होने की शिकायत दर्ज कराते हुए कहा कि कई बार आवेदन देने के बाद भी उन्हें योजना का लाभ नहीं मिल सका।
भूमि पैमाइश में देरी से बढ़ा विवाद
गौरी कला गांव के इंद्रजीत ने अधिकारियों को बताया कि भूमि पैमाइश के लिए आवेदन करने के बावजूद अब तक लेखपाल ने नाप नहीं कराई है। उनका कहना है कि प्रशासनिक लापरवाही के कारण जमीन का विवाद लगातार गहराता जा रहा है और समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा।
एसडीएम की अध्यक्षता में सुनी गईं शिकायतें
जिलाधिकारी की गैरमौजूदगी में उप जिलाधिकारी अंकित वर्मा ने समाधान दिवस की अध्यक्षता की। उनके साथ तहसीलदार राधेश्याम सिंह, नायब तहसीलदार कृतिका अवस्थी, वेद प्रकाश सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने लोगों की शिकायतें सुनीं और संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
122 शिकायतें, मौके पर केवल 20 का निस्तारण
संपूर्ण समाधान दिवस में कुल 122 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से केवल 20 मामलों का मौके पर ही निस्तारण किया जा सका, जबकि 102 शिकायतें लंबित रहीं। ऐसे में समाधान दिवस की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं। अब फरियादियों की नजर इस बात पर है कि लंबित मामलों का निस्तारण कब तक होगा और प्रशासन इन शिकायतों को कितनी गंभीरता से लेता है।
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