लखनऊ : शिक्षक छात्रों के आदर्श बनें, पोशाक और व्यवहार पर दें विशेष ध्यान – राज्यमंत्री गुलाब देवी

लखनऊ : उत्तर प्रदेश की माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री गुलाब देवी ने कहा कि शिक्षकों पर बहुत बड़ी जिम्मेदारी होती है क्योंकि अभिभावक अपना बच्चा उनके सुपुर्द करते हैं। उन्होंने शिक्षकों को सलाह दी कि वे अपने व्यवहार, आचरण और पोशाक पर विशेष ध्यान दें ताकि छात्र उनका सम्मान करें और उनका अनुसरण कर सकें।

महिला शिक्षकों को पोशाक पर खास ध्यान देने की सलाह

गुलाब देवी ने कहा कि महिला शिक्षकों को अपने पहनावे पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा, “अब कई बार पता ही नहीं चलता कि कौन छात्र है और कौन शिक्षक।” उन्होंने जोर देकर कहा कि शिक्षक हमेशा अपने आचरण से विद्यार्थियों के सामने आदर्श प्रस्तुत करें।


मेधावी सम्मान समारोह में संबोधन

राज्यमंत्री गुलाब देवी सोमवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित मेधावी सम्मान समारोह को संबोधित कर रही थीं। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार आने के बाद प्रदेश में शिक्षा का माहौल पूरी तरह बदल गया है। अब नकल-रहित परीक्षाएं हो रही हैं, जो पहले संभव नहीं था।

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मेधावी छात्रों को दी अनुशासन की सीख

मेधावी छात्रों को संबोधित करते हुए गुलाब देवी ने कहा कि जीवन में अनुशासित रहना और कठिन परिश्रम करना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा, “जो लोग अनुशासित होते हैं, वे व्यवस्थित होते हैं। ठीक समय से उठते हैं, ठीक से खाना खाते हैं और स्वस्थ रहते हैं। स्वस्थ व्यक्ति ही जीवन में आगे बढ़ता है।”

उन्होंने जोर देकर कहा कि कठिन परिश्रम और अनुशासन से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

अभिभावकों से अपील

कार्यक्रम में गुलाब देवी ने अभिभावकों से भी अपील की कि 10वीं कक्षा के बाद बच्चों के साथ मित्रवत व्यवहार करें। उन्होंने कहा कि बच्चों को अपनी हर बात माता-पिता से कहने का विश्वास होना चाहिए। उन्होंने माता-पिता से आग्रह किया कि बच्चों को मोबाइल देकर व्यस्त न करें, बल्कि उनके साथ समय बिताएं और खुलकर बात करें।

अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद

समारोह में माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री गुलाब देवी के अलावा बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री संदीप सिंह और अपर मुख्य सचिव (बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा) पार्थ सारथी सेन शर्मा भी उपस्थित रहे।

गुलाब देवी के संबोधन को शिक्षकों, छात्रों और अभिभावकों ने सराहा। उन्होंने शिक्षक-छात्र संबंधों को मजबूत बनाने और अनुशासनपूर्ण शिक्षा व्यवस्था पर बल दिया।

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