गोरखपुर, 09 जून 2026। महामहिम कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल की प्रेरणा एवं कुलपति प्रो. पूनम टंडन के मार्गदर्शन में दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर के महिला अध्ययन केंद्र तथा जिला स्वास्थ्य समिति, गोरखपुर के संयुक्त तत्वावधान में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस-2026 के अंतर्गत “गर्भवती एवं धात्री महिलाओं के अच्छे स्वास्थ्य हेतु योग शिविर” का आयोजन जिला महिला चिकित्सालय सभागार में किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को योग के माध्यम से शारीरिक, मानसिक एवं भावनात्मक रूप से सशक्त बनाना तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।
कार्यक्रम में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश झा, जिला महिला चिकित्सालय की मुख्य अधीक्षक डॉ. जय कुमार महिला अध्ययन केंद्र की समन्वयक प्रो. दिव्या रानी सिंह, चिकित्सकगण, स्वास्थ्यकर्मी एवं बड़ी संख्या में गर्भवती एवं धात्री महिलाओं ने सहभागिता की।
योग प्रशिक्षक नीलम सिंह और विंध्यवासिनी सिंह एवं उनकी टीम द्वारा प्रतिभागियों को गर्भावस्था एवं प्रसवोत्तर अवधि में किए जाने वाले सुरक्षित एवं लाभकारी योगासनों का अभ्यास कराया गया। इस दौरान ताड़ासन, वृक्षासन, बद्धकोणासन (बटरफ्लाई आसन), वज्रासन, शशांकासन, मार्जरी-व्याघ्रासन (कैट-काउ स्ट्रेच), सुखासन तथा ध्यान का अभ्यास कराया गया। प्रशिक्षकों ने बताया कि ताड़ासन एवं वृक्षासन शरीर के संतुलन एवं स्थिरता को बढ़ाते हैं, बद्धकोणासन श्रोणि क्षेत्र की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है, मार्जरी-व्याघ्रासन रीढ़ की लचक बढ़ाने एवं कमर दर्द से राहत दिलाने में सहायक है, जबकि वज्रासन एवं शशांकासन पाचन क्रिया को बेहतर बनाने तथा मानसिक तनाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इसके अतिरिक्त प्रतिभागियों को अनुलोम-विलोम, भ्रामरी प्राणायाम एवं गहरी श्वास-प्रश्वास तकनीकों का भी अभ्यास कराया गया। योग विशेषज्ञों ने बताया कि नियमित योगाभ्यास गर्भावस्था के दौरान होने वाले तनाव, चिंता, थकान एवं पीठ दर्द को कम करने में सहायक है तथा प्रसव की प्रक्रिया को सहज बनाने में मदद करता है। धात्री महिलाओं के लिए योग शारीरिक पुनर्स्थापन, मानसिक संतुलन एवं ऊर्जा वृद्धि का प्रभावी माध्यम है।
इस अवसर पर कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने अपने संदेश में कहा, “योग स्वस्थ जीवन की आधारशिला है। गर्भावस्था और मातृत्व जीवन के अत्यंत महत्वपूर्ण चरण हैं, जिनमें महिलाओं के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। नियमित योगाभ्यास न केवल गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को स्वस्थ एवं ऊर्जावान बनाए रखता है, बल्कि शिशु के समुचित विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। योग के माध्यम से हम स्वस्थ माँ, स्वस्थ शिशु और स्वस्थ समाज के निर्माण की दिशा में सार्थक कदम बढ़ा सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 की थीम ‘Yoga for Healthy Ageing’ जीवन के प्रत्येक चरण में योग की महत्ता को रेखांकित करती है।”
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश झा ने कहा कि योग मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को बेहतर बनाने का एक सरल, सुलभ एवं प्रभावी माध्यम है। उन्होंने महिलाओं से नियमित योगाभ्यास अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि स्वस्थ मातृत्व स्वस्थ समाज की आधारशिला है।
डॉ जय कुमार ने कहा कि गर्भावस्था एवं प्रसवोत्तर अवधि में विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में किया गया योग महिलाओं के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाता है तथा मातृ एवं शिशु कल्याण में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
कार्यक्रम के अंत में प्रो. दिव्या रानी सिंह ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि महिला अध्ययन केंद्र समाज के विभिन्न वर्गों में योग एवं स्वास्थ्य जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। कार्यक्रम का समापन “स्वस्थ माँ – स्वस्थ शिशु – स्वस्थ समाज” के संकल्प तथा नियमित योगाभ्यास के संदेश के साथ हुआ।
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