गोरखपुर। मिशन शक्ति अभियान के तहत महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण को मजबूत बनाने के उद्देश्य से “बहू–बेटी सम्मेलन” कार्यक्रम के मास्टर ट्रेनर्स का तीन दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण गुरुवार से होटल कोर्टयार्ड बाय मैरियट, गोरखपुर में शुरू हो गया। यह कार्यशाला गोरखपुर जोन पुलिस और यूनिसेफ उत्तर प्रदेश की संयुक्त पहल पर 11 से 13 जून 2026 तक आयोजित की जा रही है।
कार्यशाला का उद्देश्य
इस प्रशिक्षण का मुख्य लक्ष्य चयनित मास्टर ट्रेनर्स को कार्यक्रम की अवधारणा, कार्यप्रणाली और प्रभावी क्रियान्वयन की रणनीतियों से प्रशिक्षित करना है, ताकि वे अपने-अपने जिलों में इस कार्यक्रम को सफलतापूर्वक लागू कर सकें। मॉडल के रूप में गोरखपुर, महराजगंज, संत कबीर नगर और बलरामपुर जिले को चुना गया है।
मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथि
कार्यशाला का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ किया गया।
मुख्य अतिथि : पुलिस महानिदेशक, गोरखपुर जोन श्री मुथा अशोक जैन
विशिष्ट अतिथि :
– पुलिस उपमहानिरीक्षक गोरखपुर परिक्षेत्र श्री शिवशिम्पी चनप्पा
– जिलाधिकारी गोरखपुर श्री दीपक मीणा
– वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. कौस्तुभ
– यूनिसेफ चीफ ऑफ फील्ड ऑफिस डॉ. ज़कारी एडम
– बाल संरक्षण विशेषज्ञ श्री सैय्यद मंसूर उमर कादरी
यूनिसेफ का बयान
यूनिसेफ के बाल संरक्षण विशेषज्ञ सैय्यद मंसूर उमर कादरी ने बताया कि “बहू सम्मेलन” की शुरुआत अब “बहू–बेटी सम्मेलन” के रूप में हुई है, जो महिलाओं और बालिकाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में 44 मास्टर ट्रेनर्स को प्रशिक्षित किया जा रहा है, जो आगे 50 ब्लॉकों में करीब 500 ब्लॉक स्तरीय और 18 हजार से अधिक ग्राम पंचायत स्तरीय प्रशिक्षकों को तैयार करेंगे।
पुलिस अधिकारियों के विचार
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. कौस्तुभ ने कहा कि पुलिस अब अपराध के बाद कार्रवाई तक सीमित नहीं रही है, बल्कि जागरूकता और अपराध की रोकथाम पर भी सक्रिय रूप से कार्य कर रही है।
पुलिस महानिदेशक मुथा अशोक जैन ने मास्टर ट्रेनर्स को इस पहल का एम्बेसडर बताते हुए आगामी महीनों में माइक्रो प्लान के प्रभावी क्रियान्वयन का आह्वान किया।
पुलिस उपमहानिरीक्षक शिवशिम्पी चनप्पा ने विभिन्न विभागों के साथ समन्वय बनाकर इस कार्यक्रम को और व्यापक बनाने पर जोर दिया।
यूनिसेफ की सराहना
यूनिसेफ के डॉ. ज़कारी एडम ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए सरकारी विभागों, पुलिस और समुदाय की साझा भागीदारी जरूरी है। उन्होंने राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) के आंकड़ों का हवाला देते हुए आगे और प्रयास की आवश्यकता बताई।
कार्यशाला में भागीदारी
तीन दिवसीय कार्यशाला में पुलिस, महिला एवं बाल विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्राम्य विकास, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं।
इस कार्यक्रम के माध्यम से गांव-गांव तक जागरूकता फैलाकर महिलाओं और बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।













































