मैनपुरी: दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र-छात्राओं के प्रदर्शन के समर्थन में दिल्ली पहुंचने का आह्वान करना भारतीय किसान यूनियन भानू के राष्ट्रीय महासचिव अरविंद सिंह चौहान को भारी पड़ गया. जनपद मैनपुरी के थाना करहल क्षेत्र के गांव डांडी कांकन निवासी अरविंद सिंह चौहान द्वारा फेसबुक के माध्यम से समर्थकों और कार्यकर्ताओं से दिल्ली पहुंचकर प्रदर्शन में शामिल होने बाद प्रशासन हरकत में आ गया.
आरोप है कि सोमवार देर रात करीब 2:00 बजे पुलिस और प्रशासनिक टीम उनके आवास पर पहुंची और उन्हें हाउस अरेस्ट कर दिया. अरविंद सिंह चौहान ने प्रशासन की इस कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया. उन्होंने कहा कि किसी भी नागरिक को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने और लोकतांत्रिक आंदोलन का समर्थन करने का अधिकार संविधान देता है, लेकिन प्रशासन द्वारा उन्हें घर में नजरबंद कर उनकी आवाज दबाने का प्रयास किया गया. आगे कहा यह लोकतंत्र की हत्या है. आप मुझे अरेस्ट कर सकते हैं, जेल भेज सकते हैं, लेकिन मेरी आवाज बंद नहीं कर सकते. देश का युवा और देश का छात्र इस देश का भविष्य है.
भारतीय किसान यूनियन भानू उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है और उनके अधिकारों की लड़ाई में हर स्तर पर साथ देगी. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने केवल इसलिए उन्हें घर से बाहर निकलने नहीं दिया ताकि वह दिल्ली जाकर आंदोलन में शामिल न हो सकें. उनका कहना है कि सरकार विरोध की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है, जबकि लोकतंत्र में हर नागरिक को अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होने का अधिकार प्राप्त है.
सूत्रों के अनुसार, फेसबुक पर दिल्ली पहुंचने की अपील सामने आने के बाद प्रशासन ने स्थिति पर नजर रखनी शुरू कर दी थी। इसके बाद देर रात पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी उनके घर पहुंचे और उन्हें बाहर जाने से रोक दिया. इस कार्रवाई के बाद उनके समर्थकों में नाराजगी देखी गई. भारतीय किसान यूनियन भानू के पदाधिकारियों ने भी इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि किसी संगठन का पदाधिकारी छात्रों के समर्थन में जाना चाहता है तो उसे रोकना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है.
संगठन का कहना है कि छात्रों की आवाज को दबाने के बजाय सरकार को उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए. इस घटना के बाद जिले में राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है. छात्र आंदोलन के समर्थन में विभिन्न संगठनों की सक्रियता और प्रशासन की कार्रवाई को लेकर बहस छिड़ गई है. आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है.
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