रायबरेली : जिले के आसमान में एक बार फिर विमानों की गड़गड़ाहट गूंजने की सुगबुगाहट तेज हो गई है. लगभग 80 सालों से गुमनामी के अंधेरे में खोई और उपेक्षा का दंश झेल रही ऐतिहासिक इकछनिया हवाई पट्टी के दिन अब बहुरने वाले हैं. रक्षा संपदा कार्यालय लखनऊ मंडल के कड़े तेवरों के बाद प्रशासन अचानक नींद से जागा है और हवाई पट्टी की जमीन का सर्वे और सीमांकन का काम युद्धस्तर पर शुरू कर दिया गया है. इस बड़ी हलचल से जहां भू-माफियाओं में हड़कंप मच गया है, वहीं स्थानीय लोगों में हवाई सफर की उम्मीदें एक बार फिर परवान चढ़ने लगी हैं.
आपको बता दें कि रायबरेली शहर से महज 15 किलोमीटर दूर सदर तहसील का इकछनिया गांव इतिहास के एक बड़े पन्ने को खुद में समेटे हुए है। साल 1942-43 में, जब दुनिया द्वितीय विश्व युद्ध (World War II) की आग में जल रही थी, तब सामरिक दृष्टि से मजबूत किला तैयार करने के लिए अंग्रेजों ने यहाँ करीब 500 बीघे में इस विशाल हवाई पट्टी का निर्माण कराया था. कभी सेना की हलचल से गूंजने वाला यह इलाका वक्त के साथ ऐसा बंजर हुआ कि यहाँ सन्नाटा पसर गया. आलम यह हो गया कि 500 बीघे की यह कीमती जमीन सिर्फ मवेशी चराने और ग्रामीणों के जानवर टहलाने का अड्डा बनकर रह गई थी.
कीमती जमीन पर ‘कब्जाखोरों’ की नजर, अब नपेगी जमीन
सूत्रों की मानें तो इस बेशकीमती सरकारी जमीन के कई हिस्सों पर स्थानीय रसूखदारों और भू-माफियाओं ने अवैध रूप से पैर पसार लिए थे. नवाबगंज के पास ब्रिटिश काल की इस हाईपट्टी पर अतिक्रमण की तस्वीरें भी सामने आती रही हैं. लेकिन अब प्रशासन के रडार पर ये कब्जाखोर आ चुके हैं. 8 जुलाई तक हर हाल में सीमांकन की प्रक्रिया पूरी की जानी है. इस महा-सर्वे में सिर्फ राजस्व कर्मी ही नहीं, बल्कि सेना के बड़े अफसर और प्रशासन की संयुक्त टीम जमीन की एक-एक इंच नापने के लिए मैदान में उतर चुकी है.
एसडीएम के कड़े तेवर: ‘तय समय पर पूरा होगा काम’
इस पूरे मामले पर सदर एसडीएम गौतम सिंह ने कहा कि सर्वे और सीमांकन के कार्य में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी. तय समय सीमा के भीतर काम को पूरा कराया जाएगा. इस सर्वे के बाद इकछिना, कंचौदा, सराय मोहम्मद शरीफ, नवाबगंज,बेनीकामा, सान्हू कुआं, भांव और जमालपुर जैसे दर्जनों गांवों की तकदीर बदलने की उम्मीद जताई जा रही है.
स्थानीय जनता का कहना है कि हवाई पट्टी के विकास की योजनाएं इससे पहले भी कई बार बनीं, फाइलें दौड़ीं, लेकिन हर बार मामला सिर्फ सरकारी कागजों और दफ्तरों की अलमारियों तक ही सिमट कर रह गया. मगर इस बार जिस तरह से सेना और राजस्व विभाग की टीमें एक साथ जमीन पर उतरी हैं, उससे लोगों को पक्का भरोसा हो चला है कि इस बार यह ड्रीम प्रोजेक्ट धरातल पर उतरेगा. अगर यह हवाई पट्टी विकसित होती है, तो रायबरेली में रोजगार, व्यापार और आवागमन के ऐसे रास्ते खुलेंगे जिससे इलाके की पूरी सूरत ही बदल जाएगी. अब देखना यह है कि इस बार उड़ान सच में होगी या सिर्फ उम्मीदों का सर्वे ही बनकर रह जाएगा.













































